काने से अंधा भला- रामानंद सैनी

अगर आपको कोई काना व्यक्ति मिल जाए तो उसे आप अपशकुन कह्ते हैं l काने से मतलब एक आंख का, अंधे से मतलब दोनों आंखों का न होना l लेकिन जीवन में कभी कभी ऐसा अवसर आता है जब अंधा व्यक्ति अच्छा होता है काने व्यक्ति की अपेक्षा l यहां पर हम उस घटना को आपको बताएंगे जिसमें किसी व्यक्ति का कोई रोल नहीं है लेकिन कहावत के आधार पर मैंने आपको उदाहरण दिया है l 6 फरवरी 23 को जब मैं एक बारात में अपनी गाड़ी से चार मित्रों के साथ बछरावां जा रहा था तो बछरावां से शिवगढ़ की ओर मुड़ते ही मुझे रात को लगभग 7:30 बजे सामने से आती हुई एक गाड़ी दिखी l जो मुझे मोटरबाइक लग रही थी लेकिन था वह बड़ा वाला ट्रक l उस ट्रक की दाहिनी ओर की लाइट खराब थी सिर्फ बाई ओर की लाइट जल रही थी l आपको बता दें कि रात को गाड़ी चलाने में मुझे दिक्कत होती है और अब तो मुझे बहुत डर लगता है क्योंकि मैं चश्मा भी लगाता हूं तो रिफ्लेक्शन होने के साथ-साथ मेरे दिल में एक डर भी बसा हुआ है l आज से करीब 7 साल पहले जब मैं उन्नाव से बांगरमऊ मोहान होते हुए अपने घर आ रहा था तो मोहान से थोड़ा आगे मेरा एक्सीडेंट हो गया था l रात को 2:00 बजे हम अपने परिवार के सभी 7 सदस्यों के साथ कार में फस गए थे l जिसमें बड़े भाई, भतीजे, भाभी और मेरे दोनों बच्चे और पत्नी सभी बाल बाल बच गए थे, सभी को गंभीर चोट आई थी l उस दृश्य को याद कर मैं आज भी सिहर जाता हूं और शायद इसीलिए रात को मैं कभी गाड़ी नहीं चलाता l यहां तक कि पिछले 7 सालों से मैं लखनऊ के बाहर कभी किसी की बारात या किसी भी कार्यक्रम में नहीं गया l लेकिन यह बारात मेरे एक बहुत ही प्रिय शिक्षक की थी l इसलिए अन्य शिक्षकों के कहने पर मैं गया था l अगर एक लाइट जल रही हो वह भी बाई तरफ की, तो दूर से देखने में यही लगता है कि जैसे मोटरसाइकिल आ रही हो और वैसे भी ट्रक की लाइट कार की अपेक्षा बहुत तेज जलती है l चश्मा लगा होने के कारण रिफ्लेक्शन के चलते आगे बिल्कुल दिखाई नहीं देता है कि कौन आ रहा है या हमारी गाड़ी के आगे कौन जा रहा है l जब मैं उसके पास पहुंचा तो तेज गति से आ रहा ट्रक ड्राइवर ने हमारे एकदम बगल से गाड़ी को निकाला l मैं एकदम चौक गया और मौत के आगोश में आने से बाल-बाल बच गया l थोड़ी दूर जाकर के एक होटल पर कार रोककर मैंने अपने मित्रों से कहा यह गाड़ी नहीं मौत का पैगाम थी l इसीलिए मैं रात को नहीं चलता हूं l एक लाइट वाली गाड़ी से एक बार मेरा एक्सीडेंट हो चुका है l मुझ में डर भर गया है l लेकिन आप लोगों के कहने पर मैं चला था l मेरी बात को सुन कर के शिक्षक मित्र ने कहा अरे यह तो केवल कानी गाड़ी थी और आप डर गए l अगर कहीं दोनों लाइटें खराब होती हैं तब क्या होता l इसके जवाब में मैंने उनसे कहा इस कानी गाड़ी से अच्छी तो अंधी गाड़ी होती है l क्योंकि तब वह हमारी गाड़ी की लाइट में स्पष्ट दिखती l उसका रिफ्लेक्शन नहीं होता और हम आराम से बगल से निकाल लेते l लेकिन कानी गाड़ी बहुत ही खतरनाक होती है l लोगों को कभी भी एक लाइट वाली चार पहिया की गाड़ी सड़क पर नहीं चलानी चाहिए l लेकिन यह हिंदुस्तान है, सारे नियम कानून है, सजा का प्रावधान है फिर भी कोई नहीं डरता l उसका कारण सजा का तुरंत न मिलना है l जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हो जाता तब तक कार्यवाही नहीं होती l अगर उस दिन हम चारों लोग उस ट्रक की चपेट में आकर के ऊपर चले गए होते तो ट्रक वाले पर कार्रवाई होती l वह भी नाम मात्र की, क्योंकि मुझे याद है मेरा एक भाई अवध हॉस्पिटल के पास एंबुलेंस की चपेट में आकर के स्वर्ग चला गया l चालक को कुछ भी नहीं हुआ l एक महीने तक गाड़ी थाने में बंद रही और उसके बाद छूट गई l गाड़ी वालों के पास इतने बहाने हैं कि कानून उन का बाल बांका नहीं कर सकता l बस मौके पर पब्लिक न पकड़ पाए तो सब ठीक है l

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