रांची। पिछड़ा वर्ग संघर्ष मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ दिलीप सोनी ने कहा कि परिसीमन हमारे झारखंड राज्य के हित के लिए जरूरी है।
झारखंड के जनसंख्या के अनुपात में विधानसभा एवं लोकसभा में सीटों का निर्धारण होना चाहिए था। जनसंख्या को आधार मानकर 160 विधानसभा की सीट और 21 लोकसभा की सीटे होनी चाहिए। झारखंड बनने के समय ही सीटे बढ़ाना चाहिए था, जैसा कि उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में राज्य गठन के समय ही विधानसभा और लोकसभा की सीट बढ़ा दिया गए थे।
झारखंड बनने के बाद 2008 में भी पूरे देश में परिसीमन लागू किया गया था, परंतु झारखंड में परिसीमन लागू नहीं करना झारखंड की जनता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है।
कुछ तथा कथित नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए झारखंड में परिसीमन लागू नहीं होने दिया यदि परिसीमन के तहत विधानसभा की 160 सीटे बढ़ जाती है तो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत झारखंड में भी विधान परिषद का गठन हो जाएगा जिसका लाभ झारखंड के जनता को मिलेगा।
बताते चले की परिसीमन का शाब्दिक अर्थ किसी देश या प्रांत में विधायी निकाय वाले क्षेत्रीय निर्वाचन क्षेत्रों की सीमा तय करने की क्रिया या प्रक्रिया होता है। परिसीमन का काम एक उच्चाधिकार निकाय को सौंपा जाता है। ऐसे निकाय को परिसीमन आयोग या सीमा आयोग के रूप में जाना जाता है।