आलेख
ट्विंकल आडवाणी
बिलासपुर छत्तीसगढ़
कुछ दिनों से शहर की रौनक बढ़ गई है,मेरे ही नही आपके शहर की भी। प्रकृति भी अपना रंग बदलने लगी है पतझड़ समाप्त होने को है नई पत्तियां, नई पंखुड़ियां हर्षित होकर आह्वान कर रही है, क्योंकि यह अवसर है ऋतु परिवर्तन के साथ वर्ष परिवर्तन का। हम हिन्दू सिंधी हर शहर ,हर राज्य, हर देश में है और हमारा त्यौहार आने वाला है। हमारे इष्टदेव की अराधना का पर्व नववर्ष हमारा चेट्रीचंड्र और कुछ दिनों पूर्व ही कई तरह के सांस्कृतिक व भक्तिमय कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं ।
चेट्रीचंड्र सिधी समाज का प्रमुख त्योहार माना जाता है जिसमें वरुण देवता की आराधना करते हैं जिन्हें जलदेव,लाल साई के नाम से भी जाना जाता है। इसमे ज्योति जो के आटे की बनाई जाती है(दिए के समान) एक मुखी या चार मुखी जलाते हैं व अखा जिसमेें चावल ,छोटी इलायची, छुवारा हाथ मे पकड कर प्रार्थना की जाती है व इसे जल मे विसर्जन किया जाता जिससे जल मे रहने वाले जीवो को भोजन मिलता है खासकर मछलीयां जिसे लालसाई का वाहन माना जाता है।साथ ही पल्लव पहनते हैं जिसमे सर ढक कर व झोली पकड़कर प्रार्थना की जाती है।
प्रसाद के रूप मे मीठचावल,शरबत,चने ,कढा(आटे का हलवा)मुख्य रुप से होता है ।
कहते है जल ही जीवन है पृथ्वी का 70%हिस्सा जल हैऔर हमारे शरीर मे 70% हिस्सा जल है। जल का स्वभाव होता है वह घुलमिल जाता है,हर आकार में ढल जाता है वैसे ही सिंधी व्यक्ति होते हैं जो हर जगह एडजस्ट हो जाते हैं,
जल के बीना जीवन नही वैसे ही सिंधीयो के बीना व्यापार नही,आज सिंधियों का देश कि अर्थव्यवस्था मे महत्वपूर्ण योगदान है।
जल जैसे रंगहिन,स्वाद हीन होता है वैसे ही सिंधी मेहनती जात पात से उपर होते है जहाँ होते है वहां कि भाषा, खानपान स्वीकार कर लेते है।जल देव के गुण भी उनके अंदर समाऐ रहते है।
झूलेलाल साईं जल व ज्योति के देव माने जाते हैं ऐसी मान्यता है कि जो प्रतिदिन दिया जलाएं (आटे का)जोत जलाएं और जलीय जीवो को भोजन दे उनके घर में सुख शांति समृद्धि होती है।
झूलेलाल जंयती पर आधारित प्रसिद्ध कथा भी है जिसके अनुसार
भारत वर्ष के सिंध प्रांत में मिल्खा शाह नाम का बादशाह राज करता था बेहद दुष्ट अधर्मी एंव अत्याचारी था। बादशाह मिल्खाशाह वहां रह रहे हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराकर मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए यातनाएं देता था। हिंदुओं की चोटियां काट लेता जनेऊ का ढेर लगाकर अग्नि के हवाले कर देता था
मिल्खा शाह के अत्याचारों से तंग आकर नगर वासियों एवं पंचों ने सिंधु नदी के किनारे जाकर पूजा अर्चना ,प्रार्थना ,पल्लव कर के ईश्वर से गुहार लगाई, प्रसन्न होकर भगवान श्री झूलेलाल नीले घोड़े पर सवार हो प्रकट हुए और अपने भक्तों से कहा शीघ्र ही तुम्हारे कष्ट निवारण होंगे और मैं मिल्खा शाह को सबक सिखाने सिंध प्रांत में जन्म लेकर आऊंगा।
संवत् 1007 चैत्र माह शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि (चंद्र दर्शन), शुक्रवार संध्या काल को नसरपुर में रतनराय के घर माता देवकी के गर्भ से भगवान स्वरूप में श्री उडेरोलाल पुत्र के रूप में अवतरित हुए, हर्षित होकर समस्त सिंधी समाज गाने लगा आया मेरा लाल झूले मेरा लाल बस वही उद्घोष बन गया आयो लाल –झूलेलाल।
अवतरण पश्चात भगवान श्री झूलेलाल सांई ने लीलाएं दिखानी प्रारंभ की ; जिसकी चर्चा मिरखा शाह बादशाह तक पहुंची मिल्खाशाह बादशाह ने बालक झूलेलाल स़ाई को मरने के हजारों यत्न प्रयत्न किए,असफल होने पर अपने सैनिकों को झूलेलाल सांई को पकड़कर लाने का आदेश दिया। इसपर कुपित हो भगवान झूलेलाल सांई ने दरबार सहित पूरे ठठ्ठा नगर को जलमग्न कर दिया;
डूबते उतराते घबराकर मिल्खाशाह बादशाह ने भगवान झूलेलाल सांई से रहम की भीख मांगी एवं भविष्य में हिंदुओं पर अत्याचार न करने की बात कहकर भगवान श्री झूलेलाल की शरण पड़ा।
भगवान श्री झूलेलाल ने मानव धर्म की सबसे बड़ा धर्म है ईश्वर एक है और उसकी रूप अनेक है,का उपदेश देते हुए मिल्खाशाह बादशाह को सद्बुद्धि प्रदान की।
झूलेलाल साई सबको सद्बुद्धि, शांति व समृद्धि दें,लोग हमेशा धर्म का पालन करे इन्हीं शुभकामनाओं के साथ आपको चेट्रीचंड्र की शुभकामनाएं।