कर्नलगंज में हरियाली पर हमला: प्रतिबंधित व हरे भरे पेड़ों की अवैध कटान से पर्यावरण पर बड़ा संकट

आरोप है कि वर्षों से जमे वन दरोगा अशोक कुमार पाण्डेय की मिलीभगत के चलते यह फल-फूल रहा है यह अवैध कारोबार

कर्नलगंज रेलवे स्टेशन के आसपास स्थित लकड़ी टालों पर हरी लकड़ी उतारे जाने की चर्चा जोरों पर

कर्नलगंज (गोंडा)। क्षेत्र में प्रतिबंधित हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटान का मामला तेजी से तूल पकड़ता जा रहा है। आरोप है कि वन माफिया खुलेआम सक्रिय हैं और वर्षों से जमे वन दरोगा अशोक कुमार पाण्डेय की मिलीभगत के चलते यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। हालात ऐसे हैं कि दिन-रात सड़कों पर हरे पेड़ों की लकड़ी से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियां बेधड़क दौड़ती नजर आ रही हैं।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक कर्नलगंज-हुजूरपुर मार्ग, गोंडा-लखनऊ हाईवे, कटरा बाजार मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों से होकर भारी मात्रा में अवैध लकड़ी का परिवहन किया जा रहा है। बताया जाता है कि यह लकड़ी कर्नलगंज रेलवे स्टेशन के आसपास संचालित कुछ लकड़ी टालों पर उतारी जाती है, जहां बिना किसी रोक-टोक के कारोबार जारी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रतिबंधित आम सहित अन्य हरे-भरे पेड़ों की कटान खुलेआम की जा रही है।

कर्नलगंज रेलवे स्टेशन के पास एक लकड़ी टाल पर हरी लकड़ी उतारे जाने की जानकारी भी सामने आई है, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे अवैध नेटवर्क को वन विभाग और पुलिस की कथित मिलीभगत का संरक्षण प्राप्त है। आरोप यह भी है कि नियमित रूप से कथित तौर पर अवैध वसूली होने के कारण इस कारोबार पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। यही वजह है कि वन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं और पर्यावरण को लगातार नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

यह मामला न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गहरा आघात पहुंचा रहा है। यदि समय रहते इस पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो क्षेत्र में हरियाली पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले का तत्काल संज्ञान लेकर जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही अवैध कटान पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं, ताकि पर्यावरण और वन संपदा की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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