ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी के बाद पॉक्सो विशेष न्यायालय ने सुनाया फैसला; रानीपुर थाने में दर्ज हुआ था मुकदमा
बहराइच, 23 अक्टूबर। जनपद बहराइच में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत नाबालिग से अप्राकृतिक दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्ध अभियुक्त को न्यायालय ने 20 वर्ष के कठोर कारावास और कुल 30 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला 23 अक्टूबर 2026 को अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायालय पॉक्सो, बहराइच के पीठासीन अधिकारी अरविन्द कुमार गौतम ने सुनाया।

पुलिस के अनुसार, थाना रानीपुर क्षेत्र के ग्राम सपहा निवासी गरीबे पुत्र सत्तन के विरुद्ध 10 वर्षीय बालक के साथ अप्राकृतिक दुष्कर्म के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था। शिकायत के मुताबिक, 29 अप्रैल 2024 की रात करीब आठ बजे अभियुक्त बालक को खेत में ले गया और उसके साथ अपराध किया। मामले में 30 अप्रैल 2024 को थाना रानीपुर में मुकदमा अपराध संख्या 091/2024 के तहत धारा 377 भारतीय दंड विधान और पॉक्सो अधिनियम की धारा 5(m)/6 में अभियोग पंजीकृत कर विवेचना शुरू की गई।
विवेचना के बाद न्यायालय में दाखिल हुआ आरोपपत्र
पुलिस के मुताबिक, तत्कालीन विवेचक उपनिरीक्षक वीर पाल सिंह ने साक्ष्य संकलन और गवाहों के बयान दर्ज करने सहित आवश्यक विवेचनात्मक कार्रवाई पूरी करने के बाद 25 मई 2024 को न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। न्यायालय ने 21 अगस्त 2024 को अभियुक्त के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अभियुक्त को दोषसिद्ध कर सजा सुनाई।
पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष और धारा 377 में 10 वर्ष की सजा
न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड जमा न करने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। वहीं, भारतीय दंड विधान की धारा 377 के तहत 10 वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई। अर्थदंड अदा न करने पर छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
प्रभावी पैरवी से मिली दोषसिद्धि
पुलिस अधीक्षक बहराइच विश्वजीत श्रीवास्तव के निर्देशन में ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत चिन्हित अभियोगों में प्रभावी पैरवी की जा रही है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में मॉनिटरिंग सेल, थाना रानीपुर, जिला शासकीय अधिवक्ता संत प्रताप सिंह, कोर्ट मोहर्रिर ब्रजेश साहनी और थाना पैरोकार रामसिंह यादव की पैरवी से दोषसिद्धि सुनिश्चित कराने में मदद मिली।
