चुनावी माहौल पर अवधी कविता चर्चा में — सामाजिक यथार्थ को लेकर साहित्यकार की तीखी अभिव्यक्ति

उत्तर प्रदेश में जब चुनाव नजदीक आते हैं तो महफिल सजने लगती है गांव की चौपालों एवं गली चौक चौराहों खेत खलिहानों में चर्चाएं तेज हो जाती हैं हालांकि अभी चुनाव को टालने की जानकारी प्राप्त हो रही है लेकिन प्रत्याशी हर दांव मजबूत करने में लगे हैं और क्षेत्रीय जनता काफी चुनाव को लेकर उत्सुक है वही वरिष्ठ साहित्यकार राम संवारे चातक द्विवेदी जी ने अवधी कविता के माध्यम से चुनावी हकीकत बयां की है जो सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रही हैं वैसे करीब दो दर्जन के आसपास पुस्तक भी प्रकाशित हुई हैं जो अमेजॉन फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध है और सामाजिक मुद्दों पर रचनाएं लिखते रहते हैं ।

कविता 16/02/2026

महिला सीट भई लै अइबै परधानी,कराइकै बेईमानी रजऊ l
ऐसै आज केरि है सब कै कारस्तानी,कराइकै बेईमानी रजऊ ll

दारू गाँजा भाँग पियइबै,ताजी ताजी बोटी l
जीते के फिर बादि मिलै ना,चाहे माँगे रोटी ll
मँगतन से बदतर कय देबै जिनगानी,कराइकै बेईमानी….

करैं खिलाफत उनका रोजै, अपसै मा लड़वइबै l
दूरि दूरि से मिली भगति मा,जी भरि मजा उड़इबै ll
सगरौ खाय जाब ना खरचब कौड़ी कानी,कराइके…

बड़े बड़े हकिमन पर आपन,जी भरि रोब जमाइब l
करैं बेगार रात दिन हमरी , तब दुइ कौर खवाइब ll
जुरतै हौंकि देब जौ करिहैं आनाकानी,कराइकै….

चरपहिया से घूमब रोजै , देखब खूब सलीमा l
चाहै सुकरू बूड़ि जायँ, बिन पैसा मरैं हलीमा ll
तुमरिव भाग जागि जइहैं हमरे दिलजानी,कराइके…

कागज कै बस नाव चलाइब , बातन कै बस गंगा l
घरी घरी पर कपड़ा बदलब , चहै गाँव भरि नंगा ll
बनिकै रहब ठाठ से हमहूँ महरानी,कराइके….

पहिले बोलब नीक बादि मा,कूकुर जइसन काटब l
औरे के घर खोदि खोदि के , आपनि देहरी पाटब ll
चातक कब तक ऐसै छइबै छप्पर छानी,कराइके…

लेखक

राम संवारे द्विवेदी (चातक)महसी बहराइच

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *