14 जून विश्व रक्तदाता दिवस पर विशेष-  मानवता से ओतप्रोत”रक्तदान महादान”

विश्व रक्तदाता दिवस हर साल 14 जून को मनाया जाता है। मुझे इस विषय पर लिखते लिखते अकस्मात ही भीषण रेल दुर्घटना जो उड़ीसा के बालासोर में घटित हुई। यह…

मोदी 3.0 शपथ : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में रविवार को आयोजित समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलायी।

तीसरी बार PM बनकर मोदी ने रचा इतिहास :उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगातार तीसरी बार सांसद निर्वाचित हुए मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री बन कर इतिहास रच दिया। बताते…

खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर होता भारत

7 जून वैश्विक खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष- जून वैश्विक खाद्य सुरक्षा दिवस पर विशेष- खाद्यान्नों के मामले में आत्मनिर्भर होता भारत – सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” सुरेश सिंह बैस…

कहानी तुम

सुमन शर्मा, नई दिल्ली मुझे अपलक निहारती तुम्हारी आंखों की आत्मीयता मेरे जीवन की स्नेहमयी धरोहर थी । ऐसा भी बहुत बार हुआ था जब मैं खुद को तुम्हारी आंखों…

स्वर्ण मंदिर में चार दरवाजे क्यों

संजय त्रिपाठी प्रबंध संपादक नवयुग समाचार (दैनिक) भारत ही नहीं दुनिया भी जिसे स्वर्ण मंदिर के नाम से पुकारती हैं वह सिख धर्म के लोगों का धार्मिक गुरुद्वारा है जिसे…

हंसना स्वस्थ और सुखद जीवन के लिए अति आवश्यक आईए जरा हंस लें, हा हा हा हा हा……

– सुरेश सिंह बैस “शाश्वत” विश्व हास्य दिवस विश्व भर में मई महीने के 5 तारीख को मनाया जाएगा। हर साल मई के पहले रविवार को विश्व हास्य दिवस मनाया…

गरीब एवं अज्ञानी की सेवा करना प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति का फर्ज

बाबा साहेब सामाजिक क्रांति के अग्रदूत डॉ नन्द किशोर साह सदी के महानायक संविधान निर्माता, महान समाज सुधारक भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर के 134वीं जयंती मनाई जा रही है।…

हिंदू नव वर्ष पर विशेष-

पृथ्वी की संरचना काल से प्रारंभ होती है हिंदू नव वर्ष – सुरेश सिंह बैस शाश्वत पृथ्वी के निर्माण का उल्लेख ब्रह्म पुराण में मिलता है। जिसमें बताया गया है…

मानव और कृत्रिम बु‌द्धिमत्ता

मानव और कृत्रिम बु‌द्धिमत्ता संजय सोंधी, उप सचिव, भूमि एवं भवन विभाग, दिल्ली सरकार मानव के ‘मन’ व मस्तिष्क को चल प्रकृति और अदृश्य ईश्वर के समकक्ष माना जाता है।…

विश्व गौरैया दिवस (20 मार्च)

साधना सोलंकी, जयपुर चहक…वह गौरैया की! आ…लौट के आ फिर! एसी रूम में दादी का मन बेचैन है। यदा कदा घबराकर कहती है… नकली हो गया जमाना…कुछ असली नहीं रहा…रोशनदान…