गोंडा। कटरा बाज़ार थाना क्षेत्र में वन माफिया बेखौफ़ होकर प्रतिबंधित हरे-भरे पेड़ों की खुलेआम कटान कर रहे हैं। हालात यह हैं कि दिनदहाड़े हो रही इस अवैध गतिविधि से न सिर्फ वन संरक्षण कानूनों की धज्जियां उड़ रही हैं, बल्कि पुलिस और वन विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध कटान का यह खेल लंबे समय से चल रहा है, लेकिन न तो वन विभाग कार्रवाई कर रहा है और न ही पुलिस कोई ठोस कदम उठा रही है।

इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि कटरा बाज़ार पुलिस और तैनात वन दरोगा की कथित मिलीभगत में ही वन माफियाओं को अवैध संरक्षण मिल रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि प्रतिबंधित पेड़ों की कटान के बावजूद न कोई मुकदमा दर्ज हो रहा है, न लकड़ी जब्त की जा रही है और न ही किसी माफिया पर सख्त कार्रवाई नजर आ रही है। इससे वन माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे कानून और प्रशासन को खुली चुनौती देते हुए हरियाली पर आरा चला रहे हैं।
पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध कटान पर रोक नहीं लगी, तो क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जब शासन द्वारा वन संरक्षण को लेकर सख्त निर्देश दिए गए हैं, तो फिर कटरा बाज़ार क्षेत्र में ये आदेश काग़ज़ों तक ही सीमित क्यों हैं? अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आख़िर कब रुकेगा हरियाली का यह कत्ल? और कब पुलिस और वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? वहीं प्रशासनिक चुप्पी वन माफियाओं के हौंसले और मजबूत कर रही है।
