नहीं रहे पूर्व विधायक नेक चंद पांडेय

किला मजदूर यूनियन के महामंत्री समीर बाजपेई ने उन्हें किसानों का सच्चा नेता बताया।

कानपुर (उत्तर प्रदेश)। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात और नगर के वरिष्ठ नेता सुलझे हुए राजनीतिज्ञ पूर्व विधायक नेक चंद पांडे का सोमवार रात 12 बजे निधन हो गया। वे 73 साल के थे।वे शारीरिक रूप से अस्वस्थ चल रहे थे। हालांकि उनका इलाज अच्छे अस्पताल में चल रहा था किंतु बीती रात उन्होंने अपने घर पर अंतिम सांस ली। वे अपने पीछे पत्नी एक बेटा और बेटी छोड़ कर गए हैं।उल्लेखनीय है कि कानपुर जनपद की राजनीति के शलाका पुरुष चौबेपुर से पूर्व विधायक श्री पांडे की गिनती अग्रणी राजनीतिज्ञों में होती थी।

उनका लोहा केवल कांग्रेस पार्टी में ही नहीं विपक्षी भी मानते थे। विशेष बात यह रही कि उन्होंने हमेशा सुचिता और ईमानदारी की राजनीति को बढ़ावा दिया उनके ऊपर आज आज तक कभी कोई दाग नहीं लगा जिसका परिणाम यह है कि कानपुर नगर हो अथवा कानपुर देहात की बात हो सब उनके मुरीद हैं। घाटमपुर ,चौबेपुर व कानपुर देहात में ऋण वसूली को लेकर किसानों को जेल भेजने के विरोध में उन्होंने एक बड़ा आंदोलन किया था।

1985 में वे चौबेपुर से कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। साथ ही कानपुर देहात जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। क्राइस्टचर्च कॉलेज में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे। उनके पिता स्वर्गीय शिवराम पांडेय स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी थे ओर दो बार विधायक भी रहे। पूर्व विधायक की पत्नी हेमा पाण्डेय साहित्यकार हैं।

उनकी पहचान हमेशा कांग्रेस के एक संघर्षशील नेता के रूप में रही। उनके निधन पर ओईएफ फूलबाग कानपुर किला मजदूर यूनियन के महामंत्री समीर बाजपेई ने गहरा शोक व्यक्त किया है और कहा ईश्वर कि ईश्वर परिवारीजनों को दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे। महामंत्री समीर बाजपेई ने बताया उनके नाना स्वर्गीय राम अवतार शुक्ला जी से स्वर्गीय नेकचंद्र पाण्डेय जी का विशेष लगाव था।

वे उन्हें सदैव एक बड़े भाई की तरह सम्मान देते थे। वे किसानों, मजलूमों के सच्चे नेता थे।इस तरह अचानक से उनका निधन सभी के लिए बड़ा आघात है। जिसकी पूर्ति कभी नहीं की जा सकती। अंतिम दर्शनों के लिए श्री पाण्डेय का पार्थिव शरीर मंगलवार को प्रभात पब्लिक स्कूल के सामने सर्वोदय नगर कानपुर से कांग्रेस पार्टी कार्यालय तिलक हाल ले जाया गया।

जहां उनको समाज के हर वर्ग ने श्रृद्धा सुमन अर्पित किए। उसके बाद भैरव घाट पर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। जहां कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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