
संतकबीरनगर। उप डाकघर नगर पंचायत धर्मसिंहवा में बुधवार को ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) के रूप में कार्यरत रहे ओमप्रकाश मोदनवाल पुत्र जमुना प्रसाद के सेवानिवृत्त होने पर भावपूर्ण एवं भव्य विदाई समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य संरक्षक डाक निरीक्षक सोहनलाल पटेल रहे, जबकि संपूर्ण आयोजन पोस्टमास्टर धर्मसिंहवा राहुल मिश्रा के नेतृत्व में सम्पन्न हुआ।समारोह की शुरुआत पारंपरिक स्वागत के साथ हुई। विभागीय अधिकारियों और सहकर्मियों ने ओमप्रकाश मोदनवाल की लंबी सेवा-यात्रा को याद करते हुए कहा कि उनका 45 वर्षों का कार्यकाल ईमानदारी, समय पालन, कर्तव्यनिष्ठा और जन-सेवा की मिसाल रहा है। उन्होंने 13 जून 1981 को धर्मसिंहवा डाकघर से अपनी सेवा की शुरुआत की थी और इस दौरान आवश्यकता पड़ने पर कार्यालय कार्य के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी डाक सेवा उपलब्ध कराकर विभाग की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाया। इस दौरान इंस्पेक्टर सोनेलाल पटेल ने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने कार्यालय के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्र के हर घर तक डाक सुविधा पहुँचाने का काम विश्वसनीयता के साथ किया। पोस्टमास्टर राहुल मिश्रा ने उनके शांत स्वभाव, सादगी और सेवा-भावना को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि ओमप्रकाश मोदनवाल जैसे समर्पित कर्मचारी विभाग की वास्तविक शक्ति होते हैं।समारोह के दौरान डाक विभाग के कर्मचारियों ने फूलमाला, अंगवस्त्र और उपहार देकर उन्हें सम्मानित किया। सहकर्मियों ने उनके साथ जुड़े कई प्रेरक प्रसंग साझा करते हुए कहा कि विभाग को उनकी कमी हमेशा खलेगी।समारोह में बैजनाथ त्रिपाठी, वृंदावन चौधरी, अनिल पांडेय, हकीकुल्लाह खान, आशुतोष पांडेय, इंद्रकेश, सलोनी, वसुंधरा त्रिपाठी, रामविलास, कासिम, राजेश पांडेय, अमित सिंह, हिमांशु, यशवंत शुक्ला, जहाज सिंह, रमेश कुमार मद्धेशिया, विंध्याचल मद्धेशिया, विकास पासवान, राजकेश, समजाना, सत्येंद्र मिश्रा (लाइन वर्सियर), शत्रुघ्न पटवा, अच्छेलाल गौड़, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कैलाश नाथ वर्मा, इंदल राव, अनिल मोदनवाल, दर्शन कन्नौजिया, सालिम, घनश्याम मौर्या, खातून, रोहित, अनामिका सहित बड़ी संख्या में विभागीय व जीडीएस कर्मचारी उपस्थित रहे।पूरे कार्यक्रम का समापन विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा ओमप्रकाश मोदनवाल को शुभकामनाओं और सम्मान के साथ किया गया। यह समारोह उनके 45 वर्षों के समर्पित सेवा-जीवन का अविस्मरणीय सम्मान बनकर यादगार साबित हुआ।
