गदड़ा, जमशेदपुर। ना केक काटा, ना मोमबत्ती बुझाया; लड्डू काटकर जन्मदिन मनाया।

झारखंड प्रदेश के राजकीय विद्यालय में अध्ययनरत सातवीं कि छात्रा पूर्णिमा भारती ने 17 नवंबर 2025 को अपना जन्मदिन; अपने विद्यालय के कुछ विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकों के संग लड्डू काटकर मनाया।

छात्रा पूर्णिमा भारती ने अपने जन्मोत्सव के पावन दिन पर धरती माता को नमन कर अपने माता-पिता से आशीर्वाद लिया। उक्त शुभ अवसर पर पूर्णिमा ने अपने संदेश में कहा कि कई स्थानों पर ऐसा देखा जाता है कि जन्मदिन पर एमप्लीफायर का प्रयोग कर आसपास के क्षेत्र को ध्वनि से प्रदूषण किया जाता है और उस दौरान हमारे समाज के लोगों को इस प्रदूषण का सहन करना पड़ता है वहीं कई स्थानों में इस उत्सव के दौरान फुहड़ता भी देखी जाती है;

लोग केक काटकर एक दूसरे को लगाते हैं जो कि हमारे परंपरा में नहीं! केक मे कुछ कलर ऐसे होते हैं जो की मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है। जन्मदिन पर केक काटकर मोमबत्ती बुझाना उक्त पश्चिमी सभ्यता को जिस गति से हम अपनाते जा रहे हैं उसी गति से हम अपनी सभ्यता को भूलाते जा रहे हैं। जन्मदिन पर केक काटना हमारी परंपरा का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी संस्कृति से आई एक रस्म है।

यह परंपरा प्राचीन यूनानियों से शुरू हुई, जिन्होंने देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए गोल केक पर मोमबत्तियाँ जलाकर चढ़ाई थीं। भारत में पारंपरिक रूप से यह उत्सव मिठाई बांटकर मनाया जाता रहा है।

हमारी भारतीय संस्कृति में दीपक जलाना शुभ माना जाता है और प्रकाश को ईश्वर का स्वरूप माना जाता है, इसलिए मोमबत्ती या दीपक बुझाना अशुभ माना जाता है। भारतीय परंपरा के अनुसार; जन्मोत्सव दीपक जलाकर मनाया जाना चाहिए और बुझाने के बजाय उसे जलता हुआ छोड़ देना चाहिए।

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