गोंडा जिला महिला अस्पताल बना अवैध वसूली और लापरवाही का केंद्र, सीएमएस की नाकामी उजागर

बीते दिनों प्रसव के बाद दो महिलाओं की हो चुकी है मौत,सिस्टम पर खड़े हो रहे सवालिया निशान

गोंडा। जिला महिला अस्पताल, जिसे माताओं और नवजातों की सुरक्षा का मजबूत केंद्र होना चाहिए था,आज अवैध वसूली, घोर लापरवाही और अव्यवस्था का अड्डा बनता जा रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अस्पताल के भीतर अंदरूनी संघर्ष खुलकर सामने आ गया है और प्रसव के बाद हुई दो महिलाओं की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक महिला अस्पताल में हर प्रसव पर अवैध रूप से पैसे मांगे जाने, जांच व इलाज के नाम पर उगाही और गरीब मरीजों के तीमारदारों से खुलेआम वसूली की शिकायतें लंबे समय से मिलती रही हैं। इसके बावजूद न तो अब तक किसी जिम्मेदार पर ठोस कार्रवाई हुई और न ही व्यवस्थाओं में सुधार नजर आया।

चार जनवरी को डिलीवरी के बाद भर्ती कराई गई प्रसूता अनसुइया (40) की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मौत के बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में कई घंटों तक हंगामा किया और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया। परिजनों का कहना था कि समय पर समुचित उपचार नहीं मिला। इसी तरह सात जनवरी को ठकुरापुर निवासी मुकेश कुमार की पत्नी मंजू देवी (40) की भी उपचार के दौरान मौत हो गई।

इस मामले में भी परिजनों ने चिकित्सकों पर लापरवाही और इलाज के दौरान रुपये मांगने के आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया था। सूत्रों के मुताबिक जिला महिला अस्पताल में लंबे समय से प्रसव, जांच और इलाज के नाम पर अवैध वसूली की शिकायतें मिलती रही हैं। हाल ही में अस्पताल के भीतर स्टाफ नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं के बीच टकराव के बाद यह मामला और चर्चा में आ गया है।

आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनसे मरीजों से पैसे मंगवाए जाते हैं और विरोध करने पर उन्हें प्रताड़ित किया जाता है। मामले को लेकर सीएमएस डॉ. देवेंद्र सिंह का कहना है कि दोनों मौतों के मामलों की जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अवैध वसूली के आरोपों को लेकर भी विभागीय स्तर पर जांच की बात कही जा रही है।

लगातार सामने आ रही शिकायतों और प्रसव के बाद हुई मौतों से जिला महिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद जिम्मेदारों पर कोई ठोस कार्रवाई होती है या मामला फिर फाइलों में ही सिमट कर रह जाता है।

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