संजय सोंधी, उपसचिव, भूमि एवं भवन विभाग, दिल्ली सरकार
भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने और देश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना की शुरुआत की है। यह योजना मार्च 2020 में शुरू की गई थी और इसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। पीएलआई योजना के तहत कंपनियों को उनके उत्पादों की बिक्री में वृद्धि के आधार पर वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है, जिससे वे भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां स्थापित करने या विस्तार करने के लिए प्रेरित होती हैं।
इस योजना के अंतर्गत 14 प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, टेलीकॉम, सौर ऊर्जा मॉड्यूल, और ड्रोन जैसे सेक्टर शामिल हैं। सरकार ने इसके लिए 1.97 लाख करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है, साथ ही सौर पीवी मॉड्यूल के लिए 19,500 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि भी दी गई है। अब तक 764 कंपनियों को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें 176 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) भी शामिल हैं। इससे न केवल बड़े उद्योगों को बल्कि छोटे व्यवसायों को भी लाभ मिल रहा है।
पीएलआई योजना का मुख्य उद्देश्य भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है। उदाहरण के लिए, ऑटोमोबाइल क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन ईंधन वाहनों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 25,938 करोड़ रुपये की योजना शुरू की गई है। इससे न सिर्फ पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा, बल्कि 7.5 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, यह योजना आयात बिल को कम करने और निर्यात को बढ़ाने में भी मदद कर रही है।
हालांकि, इस योजना की सफलता के लिए कुछ चुनौतियां भी हैं। मूल्यवर्धन की निगरानी के लिए एकसमान मानदंडों का अभाव और कुछ सेक्टरों में ऊंचे लक्ष्य कंपनियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। फिर भी, सरकार और नीति आयोग इन समस्याओं को दूर करने के लिए कदम उठा रहे हैं। कुल मिलाकर, पीएलआई योजना भारत को आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की नई ऊंचाइयों तक ले जाने का एक मजबूत कदम है। यह न केवल उद्योगों को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि देश की युवा शक्ति को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान कर रही है।