बेखौफ बाइक सवार बदमाश फरार, पुलिस की गश्त और सुरक्षा व्यवस्था पर फिर उठे गंभीर सवाल

गोण्डा। जिले के थाना कटरा बाजार क्षेत्र अंतर्गत पहाड़ापुर गांव स्थित प्राचीन रामजानकी मंदिर से सैकड़ों वर्ष पुरानी अष्टधातु और संगमरमर की मूर्तियों की चोरी ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। हैरान करने वाली बात यह है कि बाइक सवार बदमाश दिनदहाड़े मंदिर में घुसे, मूर्तियां उठाईं और पुलिस की नाक के नीचे से बेखौफ फरार हो गए। यह घटना न केवल लोगों की आस्था पर सीधा हमला है, बल्कि जिले की पुलिस सुरक्षा व्यवस्था की भयावह पोल भी खोलती है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार शाम करीब साढ़े पांच बजे गांव की एक बालिका मंदिर में दीपक जलाने पहुंची थी। उसी दौरान दो बाइक सवार बदमाश मंदिर परिसर में दाखिल हुए और सीता की अष्टधातु की तथा श्रीराम की संगमरमर की प्रतिमा उठाकर फरार हो गए। बालिका के शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और बदमाशों का पीछा भी किया, लेकिन चोर आसानी से भाग निकलने में सफल रहे।
घटना की सूचना मिलते ही मंदिर के पुजारी हरिशंकर मिश्र ने पुलिस को अवगत कराया। मौके पर पहुंची पुलिस ने घटना के समय मंदिर में मौजूद पूजा मिश्रा से पूछताछ की और औपचारिक जांच शुरू की। ग्रामीणों के अनुसार करीब सवा सौ वर्ष पूर्व इन मूर्तियों की स्थापना की गई थी। कुछ समय पहले श्रीराम की पुरानी प्रतिमा खंडित हो गई थी, जिसके बाद संगमरमर की नई मूर्ति स्थापित की गई थी— दोनों मूर्तियां चोरी हो गई हैं। प्रभारी निरीक्षक कटरा बाजार का कहना है कि सूचना पर तत्काल स्थानीय पुलिस एवं उच्चाधिकारियों द्वारा मौके पर पहुँचकर निरीक्षण किया गया।

पुजारी की तहरीर पर अज्ञात चोरों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। घटना के अनावरण हेतु एसओजी/सर्विलांस सहित पुलिस टीमों का गठन कर लगाया गया है। शीघ्र ही प्रकरण का सफल अनावरण किया जाएगा। लेकिन सवाल यह है कि जब वारदात के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं, तो ऐसे दावे कितने खोखले हैं? प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार चोरों की उम्र करीब 30 से 32 वर्ष के बीच बताई जा रही है। वे पूरी योजना के तहत बाइक से आए, चंद मिनटों में वारदात को अंजाम दिया और फरार हो गए। घटना के बाद मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई। क्षेत्र में भय, आक्रोश और पुलिस के प्रति गहरा अविश्वास देखने को मिला।

सवालों के घेरे में पुलिस की भूमिका
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है कि इतनी कीमती और ऐतिहासिक मूर्तियों की सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? थाना क्षेत्र में नियमित गश्त के दावे आखिर कहां गए?
बाइक से आए बदमाशों को रोकने में पुलिस पूरी तरह नाकाम क्यों रही? क्या मंदिरों की सुरक्षा केवल कागजों में ही मजबूत है? क्या इस गंभीर लापरवाही के लिए किसी अधिकारी की जवाबदेही तय होगी? स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि पुलिस गश्त और रात्रिकालीन निगरानी व्यवस्था वास्तव में सक्रिय होती, तो बदमाश इस तरह बेखौफ होकर वारदात को अंजाम नहीं दे पाते।
