रांची, 27 नवंबर 2025
उपरोक्त बाते आज आदिवासी मुलेवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी
विजय शंकर नायक ने कही |इन्होने आगे कहा की रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम में 30 नवंबर को होने वाले भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका पहले ओडीआई मैच ने झारखंड के क्रिकेट जगत को पूरी तरह हिला दिया है। जहां एक तरफ क्रिकेट प्रेमी उत्साह से भरे हैं, वहीं टिकट बिक्री की अव्यवस्था, कालाबाजारी और अमानवीय नीतियों ने (झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन) की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
दर्शकों के आरोप बताते हैं कि यह मैच नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘टिकट लूट महोत्सव’ है – और इसके पीछे JCA के शीर्ष पदाधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है।
श्री नायक ने आगे कहा की टिकट के हुए ब्यापक कालाबाजारी से अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पर सीधी उंगली,उठ रहा है जिससे वे अपनी जिम्मेवारी से नही बच सकते | टिकट ब्लैक में 3से 5 गुना दाम में पुलिस के सामने बिक रहा था और ऑनलाइन टिकट मिनटों में गायब हो गए थे , काउंटर पर पहुंचो तो ‘सोल्ड आउट’।
लेकिन बाहर ब्लैक मार्केट में 1,600 रुपये का टिकट 4,000-5,000 में और 2,200 का 4,000 में बिक रहा था दर्शकों ने आरोप लगाया की JCA के टॉप अधिकारी चुप नहीं, बल्कि इस खेल के सूत्रधार थे । ब्लैकर्स ने मजदूरों और ग्रामीण महिलाओं को 300 रुपये दिहाड़ी पर लाइन में खड़ा कर टिकट खरीदवाए और मुनाफा कमाया। क्या यह सिस्टम की गलती है या मिलीभगत? JCA की मॉनिटरिंग टीम कहां सो रही है? जिसका जवाब जनता मांग रही है |
श्री नायक ने आक्रोश भरे शब्दों में कहा की गोद के मासूमों पर टिकट का बोझ ने इंसानियत की हद पार कर दिया , एक महीने के बच्चे तक को नहीं छोड़े गया ! JCA की नीति ने मानवता को शर्मसार कर दिया है – गोद में बच्चा हो या एक महीने का शिशु, हर किसी को पूरा टिकट चाहिए | “यह साफ साफ जेब काटने का निति है यह निति शायद देश में पहली बार लागु किया गया था ,!” पहली बार ऐसी अमानवीय पॉलिसी, थी जिसकी हम कड़े शब्दों में त्रिव भर्त्सना करते है |
इन्होने यह भी कहा की बाहर निकले तो नया टिकट: रि-एंट्री बंद, जनता का ‘खून निचोड़ने’ का खेल है !स्टेडियम से पानी पीने, खाना खाने या शौच के लिए बाहर निकले, तो वापस आने के लिए नया टिकट खरीदो! JCA की यह नीति दर्शकों को सुविधा नहीं, बल्कि परेशानी दे रही है। एक टिकट सिर्फ एक एंट्री की अनुमति – क्या यह प्रबंधन का लक्ष्य है या लूट का बहाना है ?
श्री नायक ने आगे कहा की 2013 से ही टिकट की कालाबजारी की शुरुवात की गई थी और आज भयावह रूप देखने को मिल रहा है | इन्होने आगे कहाः की इस कालाबजारी का मास्टरमाइंड कौन है ? अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को जवाब देना होगा आखिर :टिकट कहां गायब हुए? ब्लैकिंग का अड्डा किसके संरक्षण में? बच्चों पर टिकट की घटिया नीति किसकी? रि-एंट्री रोक किसकी साजिश? स्टेडियम में अराजकता क्यों? “जनता को अब मूर्ख बनाना बंद कीजिये !” –मै स्पष्ट रूप से कहता हूं की : रांची में क्रिकेट प्रेमियों के साथ धोखा हुआ है। यह खेल नहीं, लूट का कारोबार है।
मैं मांग करता हूं:JCA अध्यक्ष-उपाध्यक्ष से तत्काल जवाब।टिकट ब्लैकिंग पर उच्चस्तरीय जांच सीबीआई और इडी से हो ।जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई।बच्चों से टिकट वसूली नीति रद्द करो ।रि-एंट्री प्रतिबंध खत्म करना होगा ।
