भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का बदलता परिदृश्य

संजय सोंधी, उपसचिव, भूमि एवं भवन विभाग, दिल्ली सरकार

अस्सी के दशक में टेलिविज़न ने भारतीय घरों में बड़ी तेजी से अपने पैर पसारे और मनोरंजन और सूचना के एक सशक्त माध्यम के रूप में उभरा l उस समय केवल एकमात्र चैनल दूरदर्शन ही हुआ करता था l मेरे मस्तिष्क में उस वक्त के कई लोकप्रिय सीरियल जैसे ‘हम लोग’, ‘बुनियाद’, ‘ये जो हैं जिंदगी’, ‘रामायण’ और महाभारत की याद अभी भी तरोताज़ा हैं l

90 के दशक में कई केबल और सेटेलाईट चैनलों का आगमन हुआ, वर्ष 2000 के लगभग DTH के माध्यम से कई सेटेलाईट चैनल लोगों के घरों तक पहुँचने लगे l ये केबल और सेटेलाईट चैनल विभिन्न विषयों पर आधारित थे और उन्होंने पूर्व की तुलना में लोगों को अधिक विकल्प प्रस्तुत किए l

इस प्रकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में टेलीविज़न का एकछत्र आधिपत्य 2010 तक बना रहा l
वर्तमान में 20 करोड़ भारतीय घरों (70%) तक टेलीविज़न की पहुँच हैं और लगभग 90 करोड़ व्यक्ति (प्रतिदिन लगभग 4 घंटे) नियमित रूप से टेलीविज़न कार्यक्रम देखते हैं l टेलीविज़न की व्यापक पहुँच का लाभ कंपनियों ने विज्ञापन के माध्यम से संभावित उपभोक्ताओं तक अपने उत्पादों की पहुँच बनाने में बखूबी किया l

टेलीविज़न के एकछत्र आधिपत्य को सोशल मीडिया (यू ट्यूब) और OTT प्लेटफोर्म (नेटफ्लिक्स, अमेज़न प्राइम, जिओ टीवी) ने पिछले 10-15 वर्षों में सफलतापूर्वक चुनौती दी हैं l

इंटरनेट डाटा की लागत बहुत कम हो जाने से लोग इन सोशल मीडिया व OTT प्लेटफोर्म की ओर स्वत: खींचे चले आए l इन प्लेटफोर्मस पर कार्यक्रमों की व्यापक विविधता ने उन्हें लोकप्रिय बनाने में अहम् भूमिका निभाई l वर्तमान में विभिन्न OTT प्लेटफ़ॉर्मस पर 10 करोड़ भारतीय उपभोक्ता (प्रतिदिन लगभग डेढ़ घंटे) भुगतान करके इनके कार्यक्रमों का लाभ उठा रहे हैं l इसी प्रकार लगभग 50 करोड़ भारतीय प्रतिदिन एक घंटा नियमित तौर पर यू ट्यूब का उपयोग कर रहे हैं l

यह संख्या किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक हैं l यहीं स्थिति इंस्ताग्राम की भी हैं, जिस पर 37 करोड़ भारतीय सक्रिय हैं l इस प्रकार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में टेलीविज़न को सोशल मीडिया और OTT प्लेटफोर्म ने सफल चुनौती पेश की हैं l इसका प्रभाव विज्ञापन के संदर्भ में देखने को मिला हैं l अब टेलीविज़न चैनल कुल विज्ञापन का 28% आय प्राप्त कर पाते हैं जबकि सोशल मीडिया व OTT जैसे डिजिटल प्लेटफोर्म लगभग 50% विज्ञापन आय प्राप्त करते हैं l

यह भी सत्य हैं कि डिजिटल प्लेटफोर्म की दर्शक संख्या में जबर्दस्त वृद्धि कोरोना काल में ही हुई थी और उसके पश्चात दर्शक संख्या में वृद्धि दर लगातार कम होते हुए सन 2023 में मात्र 13% रह गई l हालांकि यह भी सत्य हैं कि टीवी चैनलों की दर्शक संख्या में कुछ कमी आई हैं, इनकी विज्ञापन आय पिछले कुछ वर्षों में लगभग स्थिर रही हैं l

इन विपरीत परिस्थितियों में वाणिज्यिक रूप से लाभ प्रद बने रहने के लिए tata play (DTH) और airtel digital media ने merger की घोषणा की है ताकि ‘इकॉनमी ऑफ स्केल’ का लाभ उठाया जा सके l इस प्रकार स्थापित नया DTH ऑपरेटर 3.5 करोड़ उपभोक्ताओं के साथ बाज़ार में प्रथम स्थान पर रहेगा l

पिछले 3-4 वर्षों से विभिन्न DTH ओपरेटरस की कुल राजस्व आय में कमी स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही हैं और उन्हें अपने अस्तित्व को बचाए रखने और डिजिटल मीडिया से प्रति स्पर्धा करने हेतु merger & acquisition प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ रहा हैं l

OTT plateform आपरेटरस ने भी अपनी कमर कस ली हैं और रिलायंस समूह की कंपनी जिओ ने लगभग 8.6 अरब डॉलर में डिज्नी हॉट स्टार का अधिग्रहण कर डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में अपनी स्थिति को और मज़बूत कर लिया है l

इस प्रकार भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अब एक चौराहे पर आकर खड़ा हो गया हैं l जहाँ टेलीविज़न चैनल की पहुँच अभी भी सर्वाधिक दर्शकों तक हैं लेकिन अब उनकी वृद्धि दर लगभग शून्य हो चुकी हैं l

दूसरी ओर डिजिटल मीडिया में दर्शक वृद्धि दर में पर्याप्त कमी आई हैं लेकिन विज्ञापन आय का अधिकांश हिस्सा इन्हीं डिजिटल माध्यमों की तरफ जा रहा हैं l
दोनों प्रतिस्पर्धी वर्ग बाज़ार में टिके रहने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं और अपनी रणनीति में किस हद तक सफल हो पाते हैं, यह भविष्य के गर्भ में हैं l

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