भाषा हमारे राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है – डॉ. अशोक कुमार भार्गव

मातृभाषा सामाजिक एकीकरण करने का काम करती है – डॉ. अशोक कुमार भार्गव

हिंदी को बढ़ावा देने के लिए स्वयं में सम्मिलित करना होगा – डॉ. मृदुल कीर्ति अमेरिका

हिंदी के लिए सहज होना पड़ेगा- डॉ. आरती परीख, सऊदी अरब

विश्व मातृभाषा दिवस पर विश्व हिन्दी परिषद की संगोष्ठी

नई दिल्ली/ लखनऊ – विश्व मातृभाषा दिवस के अवसर पर विश्व हिन्दी परिषद द्वारा आयोजित संगोष्ठी का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. विपिन कुमार, राष्ट्रीय महासचिव, विश्व हिंदी परिषद ने अध्यक्षता की, जबकि डॉ अशोक कुमार भार्गव, पूर्व आई.ए.एस. और डॉ मृदुल कीर्ति ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त किए।
सडॉ. अशोक कुमार भार्गव, पूर्व आई.ए.एस. ने अपने वक्तव्य में कहा कि मातृभाषा हमारी संस्कृति और पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह राष्ट्रीय स्वाभिमान का प्रतीक है और सामाजिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
‌‌डॉ. विपिन कुमार, राष्ट्रीय महासचिव, विश्व हिंदी परिषद ने कहा कि विश्व हिन्दी परिषद मातृभाषा के संरक्षण और प्रचार के लिए प्रतिबद्ध है। हम सभी को मातृभाषा के प्रति जागरूक रहने और इसे बढ़ावा देने के लिए काम करना चाहिए।”
डॉ. मृदुल कीर्ति, संयोजक, अमेरिका विश्व हिंदी परिषद हिंदी को बढ़ावा देने के लिए हमें इसके प्रति सहज होना पड़ेगा। हमें हिंदी को अपने दैनिक जीवन में शामिल करना चाहिए और इसे अपने बच्चों को सिखाना चाहिए।
डॉ. आरती परीख, सऊदी अरब ने कहा कि मातृभाषा हमारी पहचान है और हमें इसे बचाने के लिए काम करना चाहिए। विश्व हिन्दी परिषद का यह आयोजन मातृभाषा के महत्व को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
संगोष्ठी में डॉ. कृष्ण आचार्य, डॉ. कासम खान आजाद, डॉ. उमेश कुमार प्रजापति, डॉ. मीना घूमे, डॉ. विजय पाटिल, डॉ. संगीता सिंह बनाफर, डॉ. रमाकांत राय, विजय जोशी, रिचा चतुर्वेदी, डॉ मुनीश चंद्र शर्मा और अन्य ने भाग लिया। सभी ने मातृभाषा के महत्व पर चर्चा की और इसे बढ़ावा देने के लिए संकल्प लिया। डॉ विक्रमादित्य सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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