
चरक/भोक्ता पूजा : जमशेदपुर, हाथी बिंदा पंचायत अंतर्गत श्री श्री कालेश्वर मंदिर, साधुडेरा में आगामी 13 एवं 14 अप्रैल 2026 को होने वाले चरक/भोक्ता पूजा को लेकर वहां के स्थानीय मुखिया कृष्णा मुंडा की नेतृत्व में तैयारी जोरों पर है। गौरतलब हो कि प्रकृति के मनोरम दृश्य से घिरा, आबादी से दूर, नदी तट से लगा श्री श्री कालेश्वर मंदिर साधुडेरा लगभग 10 एकड़ में अवस्थित है। मंदिर परिसर में उपस्थित मुखिया कृष्ण मुंडा एवं पुजारी कमल सरदार ने मीडिया को बताया कि आगामी 13 अप्रैल से आरंभ होकर 14 अप्रैल तक इस प्राचीन मंदिर परिसर में चरक पूजा मनाया जाना है।
वहां उपस्थित पुजारी कमल सरदार ने बताया कि 13 तारीख को जागरण और छऊ नृत्य के साथ आरंभ होकर; 14 तारीख को भोक्ता पूजा मनाया जाएगा। भोक्ता पूजा के दौरान 60 से 70 फीट की ऊंचाई पर श्रद्धालु पेट के बल झूलते हैं। वें बोले मंदिर परिसर में एक छोटा सा जलाशय है जिसे गुप्त गंगा कहा जाता है। इसकी खासियत है कि पानी कभी सूखता नहीं; लाखों की संख्या में भी अगर श्रद्धालु आ जाए; तो भी इस गुप्त गंगा में पानी बरकरा रहता है।

इस गुप्त गंगा का कंजल, स्वच्छ, सुंदर पानी पिकर श्रद्धालु तृप्त हो जाते हैं। गुर्रा नदी के तट पर अवस्थित यह मंदिर में; अनेक गांव- पंचायतों से; अपने मनोकामनाएं लिए श्रद्धालु गण यहां हजारों की संख्या में यहां पहुंचते है और तृप्त होकर जाते हैं।
विदित हो की चरक पूजा, एक हिंदू लोक उत्सव है जो भगवान शिव के सम्मान में मनाया जाता है जिसे नील पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह त्योहार भारत में विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। कैलेंडर के अनुसार चैत्र महीने के आखिरी दिन चैत्र संक्रांति की आधी रात को मनाया जाता है, लोगों का मानना है कि चरक पूजा करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और यह पर्व पिछले वर्ष के दुखों और कष्टों को दूर कर समृद्धि लाता है।
इस त्योहार को हजरा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन महिलाएं पूजा से पहले भोजन नहीं करती हैं। इस त्योहार में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए एक मानव चरक तैयार किया जाता है। चरक को उसके पेट पर एक हुक के साथ बांधा जाता है और फिर उसे एक लंबी रस्सी के सहारे एक पट्टी के चारों ओर घुमाया जाता है।
हालांकि यह जोखिम भरा है, वे इसकी व्यवस्था करते हैं। मौके पर हाथी बिना पंचायत क्षेत्र के मुखिया कृष्णा मुंडा, पुजारी लया, कमल सिंह, भीम मुंडा, भुवनेश्वर मुंडा गुमान कर्मकार, महेश्वर मुंडा शंकर कर्मकार, भास्कर मुंडा, कमल माझी, धर्मेंद्र मुंडा, जगन्नाथ मुंडा, विकास पत्रों, मंगल मुंडा, दिलीप पत्रों एवं गणेश्वर मुंडा समेत ग्रामीण उपस्थित रहे।
