बहराइच (महसी): प्रतिभा और जुनून जब एक साथ मिलते हैं, तो उम्र महज एक आंकड़ा बनकर रह जाती है। जनपद के महसी तहसील अंतर्गत रेहुआ मंसूर निवासी 21 वर्षीय आकाश मिश्रा ‘ओम’ ने इसे सच कर दिखाया है। आकाश ने वह साहसी कदम उठाया है जिसकी कल्पना इस उम्र के युवा कम ही कर पाते हैं।

भारतीय रेलवे के राजस्थान स्थित कोटा मंडल (DRM Office) जैसी प्रतिष्ठित जगह पर प्रशासनिक सेवा देने के बाद, उन्होंने अपने जुनून ‘पत्रकारिता’ के लिए सरकारी सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया है।आकाश की पत्रकारिता की नींव उनके स्कूली दिनों में ही पड़ गई थी। जब वे कक्षा 10 के छात्र थे, तभी से उन्होंने अपने पिता, क्षेत्र के वरिष्ठ पत्रकार श्री विनोद कुमार मिश्रा जी के मार्गदर्शन में समाज की समस्याओं को समझना शुरू कर दिया था।
उनके इस जज्बे को असली पहचान कोरोना काल की विभीषिका में मिली। मात्र 15-16 साल की उम्र में, जब अनुभवी लोग भी घरों से निकलने में डर रहे थे, आकाश ने जान जोखिम में डालकर ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को शासन तक पहुँचाया।अपनी योग्यता के बल पर बहुत कम उम्र में रेलवे की नौकरी पाने वाले आकाश ने कोटा डीआरएम ऑफिस में कार्य करते हुए सरकारी तंत्र की बारीकियों को समझा।
लेकिन पिता से विरासत में मिले पत्रकारिता के संस्कारों ने उन्हें वापस अपनी मिट्टी की ओर लौटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने सुरक्षित भविष्य के बजाय ‘कलम का सिपाही’ बनना चुना। वर्तमान में आकाश पूर्णकालिक पत्रकारिता के साथ-साथ उच्च स्तरीय सरकारी सेवाओं (बड़ी नौकरी) की तैयारी भी कर रहे हैं।
उनका मानना है कि पत्रकारिता और प्रशासनिक समझ के मेल से वे समाज में और भी बड़ा सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं। पिता श्री विनोद कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में आकाश की प्रखर रिपोर्टिंग आज महसी क्षेत्र में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के खिलाफ एक सशक्त आवाज बन चुकी है।
