कर्नलगंज (गोंडा)। कर्नलगंज कस्बे के मोहल्ला बजरंगनगर (मेंहदी हाता) में नगर पालिका द्वारा कराए गए आरसीसी सड़क निर्माण में भारी अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बाद भी न तो अब तक स्थलीय निरीक्षण कराया गया है, न ही टीएसी (तकनीकी जांच समिति) से जांच कराई गई और न ही किसी जिम्मेदार के खिलाफ कार्रवाई हुई।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह सड़क विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि नगर पालिका के जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में हुए भ्रष्टाचार, लापरवाही और जेई–ठेकेदार की मिलीभगत का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। सूत्रों के अनुसार सड़क निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों की खुलकर अनदेखी की गई।
निर्माण में प्रयुक्त सीमेंट, गिट्टी (एग्रीगेट), मिश्रण अनुपात और निर्माण प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि कागज़ों में सड़क की मोटाई 200 मिमी दर्शाई गई है, जबकि मौके पर महज 80 से 100 मिमी की ढलाई कर औपचारिकता निभा दी गई।
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि सड़क निर्माण में जीएसबी (ग्रैन्यूलर सब-बेस) का प्रयोग नहीं किया गया, क्योरिंग पूरी तरह नदारद रही और घटिया गुणवत्ता की सामग्री का इस्तेमाल किया गया। यही कारण है कि निर्माण के कुछ ही समय बाद सड़क पर जलभराव की स्थिति बनने लगी है,जिससे आने वाले दिनों में सड़क के टूटने, धंसने और दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है।
नगरवासियों का कहना है कि यह सड़क जनता के टैक्स के पैसों की खुली लूट और कमीशनखोरी का परिणाम है। सूत्रों का दावा है कि पूरे निर्माण कार्य में जेई और ठेकेदार की गहरी सांठ-गांठ रही। बताया जाता है कि बिना गुणवत्ता नियंत्रण, बिना तकनीकी परीक्षण और बिना किसी भय के निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया,जबकि जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। सबसे गंभीर सवाल यह है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अब तक इस मामले का संज्ञान क्यों नहीं लिया? न तो स्थलीय निरीक्षण हुआ, न तकनीकी जांच और न ही किसी अधिकारी से जवाब-तलब।
प्रशासन की यह चुप्पी इस आशंका को और मजबूत करती है कि कहीं पूरे मामले को दबाने की कोशिश तो नहीं की जा रही। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला कर्नलगंज में भ्रष्टाचार को खुली छूट देने का खतरनाक उदाहरण बन जाएगा।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस घटिया आरसीसी सड़क की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराएगा? क्या जेई और ठेकेदार की भूमिका की ईमानदार जांच होगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दफन कर दिया जाएगा? नगरवासियों की निगाहें अब प्रशासन पर टिकी हैं कि कार्रवाई होगी या भ्रष्टाचार की यह सड़क यूं ही जनता की गाढ़ी कमाई निगलती रहेगी।
