मेयर आरक्षण रोटेशन से अनुसूचित जाति का हक छीना, अब मात्र दो सीट—हेमंत सरकार पर एससी समुदाय को हाशिये पर धकेलने की साजिश, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जायेगा ”विजय शंकर नायक


रांची।
रांची नगर निगम चुनाव के नए आरक्षण ढांचे में अनुसूचित जाति एससी समुदाय के लिए मात्र दो सीटें निर्धारित किए जाने के फैसले ने अनुसूचित जाति समाज को झकझोर कर रख दिया है। आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने इस फैसले को दलित समाज के साथ खुला अन्याय, लोकतंत्र में समान प्रतिनिधित्व के रीढ़ पर प्रहार और संवैधानिक मूल्यों का सीधा अपमान करार दिया है।


श्री नायक ने तीखे शब्दों में कहा की “रांची जैसी राजधानी में एससी समुदाय को केवल दो सीट देकर हेमंत सरकार यह साबित कर रही है कि सामाजिक न्याय उनके लिए सिर्फ भाषण का मुद्दा है, हकीकत में नहीं। यह फैसला लोकतंत्र, समान प्रतिनिधित्व और संविधान की आत्मा को ठेस पहुंचाता है।

” स्थानीय निकायों में आरक्षण का सिद्धांत जनसंख्या अनुपात और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तय होना चाहिए, लेकिन रांची जैसे बड़े नगर निगम में केवल दो सीट आरक्षित करना यह सिद्ध करता है कि सत्ता पक्ष आरक्षण को केवल औपचारिकता बना देना चाहता है। पिछले आरक्षण चक्रों में SC समुदाय को रांची नगर निगम के मेयर सिट को आरक्षित किया गया था जिसे हेमंत सरकार ने बदल कर एससी समुदाय के हक को छिना अब मात्र दो सीट का आरक्षण तक सीमित कर देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है—क्या यह जनसंख्या आधारित नहीं बल्कि राजनीतिक गणित आधारित आरक्षण है? क्या यह किसी विशेष वर्ग को कमजोर करने की रणनीति है?हेमंत सरकार को इसका जवाब देना होगा


श्री नायक ने आगे कहा की यह फैसला सिर्फ दो सीटों का मामला नहीं है, यह पूरे समुदाय की राजनीतिक भागीदारी को सीमित करने की कोशिश है। यह लोकतांत्रिक ढांचे और सामाजिक न्याय के साथ छल है।”जो कदापि स्वीकार नही किया जायेगा एससी मेयर सिट का आरक्षण खत्म किया गया अब सिर्फ दो सीट—यह बदलाव नहीं, एससी समुदाय को कमजोर करने की चाल है जिसे अब यह अन्याय स्वीकार नहीं किया जायेगा ” उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस अन्यायपूर्ण निर्णय में सुधार नहीं किया गया तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करेगा और इसका बड़ा

सामाजिक-राजनीतिक विरोध होगा। यह एक राजनीतिक सौदेबाजी नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। यह व्यवस्था अनुसूचित जाति समुदाय के साथ अन्याय ही नहीं, बल्कि उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का अपमान है।

यदि इसी प्रकार जनसंख्या के अनुपात की उपेक्षा की जाएगी, तो स्थानीय शासन में कमजोर वर्गों की आवाज़ हमेशा दबेगी, और रांची जैसी महानगर में सामाजिक न्याय का वास्तविक मायने खो जाएगा अनुसूचित जाति समाज का योगदान केवल मतदाता तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम की नीतियों, विकास योजनाओं और निर्णयों में भी उनकी भागीदारी अनिवार्य है। ऐसे में सीटों की संख्या घटाकर उनके अधिकारों का हनन करना संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक समानता की भावना का अपमान है।


विजय शंकर नायक ने कहा कि “SC समुदाय को हाशिये पर धकेलने की कोई कोशिश कामयाब नहीं होने दी जाएगी। यह फैसला बदले बिना लोकतांत्रिक ईमानदारी साबित नहीं हो सकती।”अनुच्छेद 243-T स्पष्ट रूप से कहता है कि स्थानीय निकायों में SC/ST समुदाय को उनकी जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।रांची की वास्तविक जनसंख्या के अनुपात के मुकाबले मात्र दो सीट देना सीधे-सीधे संवैधानिक भावना के विपरीत है।

नायक ने साफ कहा कि—यह लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं, सम्मान और अधिकारों की लड़ाई है।आरक्षण की इस संरचना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि आवश्यक हुआ तो इसे जन आंदोलन और न्यायिक लड़ाई में भी बदला जाएगा।हमारी मांग आरक्षण व्यवस्था की पुनर्समीक्षा, जनसंख्या आधारित वास्तविक गणना, पारदर्शी और निष्पक्ष आरक्षण मॉडल जारी करने की मांग है जिसे पूरा करना होगा नही तो अनुसूचित जाति के लोग नगर निगम चुनाव में वोट बहिष्कार का फैसला लेगा

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