रांची की एतिहासिक बंदी गूंगी बहरी हेमंत सरकार के मुहँ पर कड़ा तमाचा है, सरकार अभी भी आंख खोले और आदिवासी समाज के भावनाओ को सम्मान करने का कार्य करे – विजय शंकर नायक

प्रकाशनार्थ
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रांची 22 मार्च 2025

आज आदिवासी मूलवासी जनाधिकार मंच के केन्द्रीय उपाध्यक्ष विजय शंकर नायक ने रांची की एतिहासिक एवं शत प्रतिशत बंद होने पर कही l इन्होंने यह भी कहा कि हेमंत सोरेन सरकार धृतराष्ट्र की तरह आंख मूँद कर आदिवासी समाज के भावनाओ के साथ खिलवाड़ करने का कार्य कर रहे है और समाज के समस्याओ की अनदेखी कर रहे है l

जबकि आदिवासी समाज लगातार तीन महिने से आंदोलनरत है फिर भी इनके कानू में जूँ तक रेंगने का काम नहीं किया और ये आदिवासी समाज के समस्याओं के समाधान पर कभी गंभीरता नहीं दिखाने का कार्य नहीं किया जिससे यह प्रतीत होता है कि ये सिर्फ और सिर्फ आदिवासी वोट के सौदागर हैं जिसका मात्र वोट लेना भर ही मकसद है।

विजय शंकर नायक ने आगे कहा कि सिरम टोली के मुख्य द्वार पर फ्लाई ओवर से रैम्प हटाने की मांग को लेकर आदिवासी समाज द्वारा मानव श्रंखला बनाया गया इनको ध्यान आकृष्ट करने के लिए तो ये रास्ता बदल कर दुसरे रास्ते से समाज के लोगो की अनदेखी कर निकल गये निकल गये और इस पर कोई गंभीरता नही दिखाई जब समाज के लोग सभी आदिवासी विधायको एवं भाजपा के रांची सासंद, विधायक का पुतला दहन किया गया और सदन मे रांची विधायक ने बात रखी तो श्री हेमंत सोरेन ने मात्र सदन मे जवाब दिया कि सरहुल पर्व धुम धाम से मनाया जायेगा मगर समाज के मुख्य विषय सिरम टोली के मुख्य द्वार पर फ्लाई ओवर से रैम्प हटाने की दिशा मे बोलने से बचे रहे जिससे आदिवासी समाज के बीच सकारात्मक संकेत ना जाकर गलत संदेश गया और उसी का परिणाम है आज रांची की एतिहासिक बंदी रही है ।

विजय शंकर नायक ने साफ शब्दो मे कहा कि सरकार छोटानागपुर के आदिवासी समाज के भावनाओ के साथ एवं उनके धार्मिक स्थलो के साथ खिलवाड करना बंद करे अन्यथा इसके बहुत ही गंभीर परिणाम हो सकते है इसलिए किन्तु परन्तु ना करते हुए एवं तथाकथित आदिवासी समाज का दलाली करने वालो की बातो को ना सुनते हुए तुरंत सरहुल से पूर्व सिरम टोली के मुख्य द्वार पर फ्लाई ओवर से रैम्प हटाने की दिशा मे कारवाई करे नही तो समाज अब डाइरेक्टर एक्शन मोड मे आने का कार्य करेगी और सिरम टोली के मुख्य द्वार पर फ्लाई ओवर से रैम्प हटाने की दिशा मे अपने कार्य करेगी जिसकी जिम्मेवारी आप पर होगी ना कि आदिवासी समाज पर ।

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