नहीं रहे अंग्रेजों के जमाने के जेलर, 84 की उम्र में निधन, दिवाली के दिन बुझ गया उनके दिल का दिया।

गोवर्धन असरानी : सिंधि परिवार में जन्मे हास्य अभिनेता गोवर्धन असरानी, देश के बँटवारे के पश्चात उनका परिवार जयपुर आ गया था। वहीं उनका जन्म 1941 में हुआ। भारतीय सिनेमा का वह प्यारा चेहरा, जिसने अपनी कॉमिक टाइमिंग और अदाकारी से लोगों के दिलों में जगह बनाई, इस दिवाली में अंग्रेजों के जेलर हमारे बीच नहीं रहे।

वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे; यह जानकारी उनके भतीजे अशोक असरानी ने दी। असरानी का कॉमेडी रोल में अमूल्य योगदान रहा है। वे मूल रूप से जयपुर के रहने वाले थे। उनकी स्नातक तक कि शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल जयपुर से हुई थी। हालांकि करीब 3 बजे के आस-पास असरानी के इंस्टाग्राम अकाउंट से दिवाली की शुभकानाएं दी गईं थीं और 4:00 बजे शाम को वे अलविदा कह गए।

उनकी कॉमिक टाइमिंग और संवाद बोलने का तरीका दर्शकों को हमेशा याद रहेंगे। अभिनय के अलावा असरानी ने कुछ फिल्मों में निर्देशन और कहानी लेखन भी किया था। उन्होंने ‘चल मुरारी हीरो बनने’, ‘सल्लाम मेम साब’ जैसी फिल्मों को निर्देशित किया। गुजराती सिनेमा में भी उन्होंने अपनी प्रतिभा दिखाई। हाल ही में वे ‘धमाल’ जैसी हास्य फिल्मों में भी काम करते रहे। उनका योगदान हिंदी सिनेमा में लंबे समय तक याद किया जाएगा। उनके परिवार, सहयोगियों, फैंस व सिनेमा जगत इस खबर से बेहद दुखी हैं। असरानी के पी ए बाबूभाई ने इंडिया टुडे को बताया, “असरानी साहब को चार दिन पहले जुहू स्थित भारतीय आरोग्य निधि अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

डॉक्टरों ने बताया कि उनके फेफड़ों में पानी जमा हो गया था और आज, 20 अक्टूबर को उनका निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। जब उनसे पूछा गया कि परिवार ने इतनी जल्दी अंतिम संस्कार क्यों किया, तो उन्होंने बताया कि अभिनेता शांति से जाना चाहते थे और उन्होंने अपनी पत्नी मंजू से कहा था कि उनकी मौत को कोई बड़ा मुद्दा न बनाएं। यही वजह है कि परिवार ने अंतिम संस्कार के बाद ही उनके निधन के बारे में जानकारी दी.”। उम्मीद है कि परिवार जल्द ही एक बयान जारी कर सकता है, हालांकि एक प्रार्थना सभा की योजना बनाई जा रही है।

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