केएल इंटर कॉलेज कर्नलगंज का खेल मैदान बना कूड़ा डंपिंग स्थल, जिम्मेदार मौन

ईदगाह-कब्रिस्तान के पास खुलेआम गंदगी और गौवंशों का जमावड़ा

नगर पालिका की खुली मनमानी,कर्नलगंज प्रशासन की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

कर्नलगंज, गोंडा। तहसील मुख्यालय स्थित कर्नलगंज कस्बे में हुजूरपुर रोड स्थित कन्हैयालाल इंटर कॉलेज के क्रीड़ा स्थल और उसके बगल ईदगाह कब्रिस्तान के पास फैली भारी गंदगी और कूड़े कचरे का ढेर अब महज लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित कूड़ा डंपिंग का नतीजा बन चुकी है।स्थानीय लोगों के अनुसार यहां नगर पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी के निर्देश पर कस्बे के विभिन्न मोहल्लों से प्रतिदिन बड़े पैमाने पर कूड़ा-कचरा और गंदगी लाकर यहां डंप कराई जा रही है। खेल मैदान,जहां बच्चों को स्वस्थ वातावरण मिलना चाहिए, आज कचरा डंपिंग जोन बन चुका है।सड़ा-गला कूड़ा, प्लास्टिक और खुले में फेंका गया अपशिष्ट न सिर्फ भीषण दुर्गंध फैला रहा है, बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा भी पैदा कर रहा है। बेसहारा गौवंश कूड़े में मुंह मारते दिखाई दे रहे हैं,जिससे सड़क दुर्घटनाओं और पशुओं की मौत की आशंका भी बढ़ गई है।धुंध और गंदगी के बीच सड़क किनारे खड़े पशु न सिर्फ यातायात के लिए खतरा हैं, बल्कि यह दृश्य स्वच्छता अभियान और गौ-संरक्षण के दावों की पोल खुल रही है। स्वच्छ भारत मिशन, स्मार्ट सिटी और गौ-संरक्षण जैसे सरकारी दावे यहां कागज़ों में सिमटे नजर आते हैं,जबकि हकीकत में एक खेल मैदान को कूड़ा डंपिंग जोन में तब्दील कर दिया गया है।ईदगाह और कब्रिस्तान जैसे संवेदनशील स्थल के सामने इस तरह की गंदगी सामाजिक और धार्मिक भावनाओं के साथ भी खुला खिलवाड़ है। नगर पालिका, पशुपालन विभाग, शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन—सबकी जिम्मेदारी तय होने के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं? स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतों के बाद भी न कूड़ा डंपिंग बंद होता है, न गौवंशों के उचित संरक्षण की व्यवस्था होती है,और न ही मैदान की साफ-सफाई।नतीजा बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। यह तस्वीरें सिर्फ गंदगी नहीं दिखातीं बल्कि प्रशासनिक उदासीनता,जवाबदेही के अभाव और सरकारी दावों की खोखलाहट को बेनकाब करती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब दिन-दहाड़े, रोजाना हो रहा है, इसके बावजूद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की नजर नहीं पड़ना कई सवाल खड़े करता है।क्या यह अनदेखी महज संयोग है या फिर जानबूझकर आंख मूंद ली गई है? आखिर कब तक प्रशासन इस गंभीर जनस्वास्थ्य संकट पर चुप्पी साधे रहेगा? क्या कर्नलगंज में खेल मैदान सिर्फ नाम के हैं? क्या स्वच्छता और गौ-संरक्षण केवल फाइलों तक सीमित रहेंगे? और आखिर कब होगी जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई?

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