नौकरी के लिए 2 दिन में चाहिए क्लीन चरित्र प्रमाण-पत्र, पुलिस की गलती से दर-दर भटक रहा युवक

गोंडा। उत्तर प्रदेश पुलिस का एक और गंभीर कारनामा सामने आया है, जहां सिस्टम की लापरवाही एक बेरोजगार युवक के भविष्य पर भारी पड़ रही है। पुलिस ने नाम और पिता का नाम समान होने पर बिना पते का मिलान किए, दो अलग-अलग गांवों के दो युवकों को एक ही व्यक्ति मान लिया और निर्दोष युवक के चरित्र प्रमाण-पत्र में दूसरे युवक पर दर्ज मुकदमे को ठोंक दिया।
पीड़ित युवक के पास नौकरी के लिए चरित्र प्रमाण-पत्र जमा करने को सिर्फ 2 दिन बचे हैं, लेकिन पुलिस की इस गंभीर चूक के कारण उसका प्रमाण-पत्र दागी हो गया है और वह एसपी कार्यालय से थाने तक चक्कर काटने को मजबूर है।
पहले क्लीन, अब दागी – कैसे बदला प्रमाण-पत्र?
ग्राम बसालतपुर पोस्ट नहवा परसौरा, थाना कर्नलगंज निवासी अंकित श्रीवास्तव पुत्र महेश्वरी श्रीवास्तव को पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल द्वारा 13 जनवरी 2026 को जारी प्रमाण-पत्र संख्या 316462600109 में क्लीन चिट दी गई थी। रिपोर्ट में साफ लिखा था – थाना कर्नलगंज, एलआईयू और डीसीआरबी में कोई प्रतिकूल प्रविष्टि नहीं।

लेकिन 24 सितंबर 2026 को पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह द्वारा जारी दूसरे प्रमाण-पत्र संख्या 316462644928 में अचानक FIR No. 384/2024 धारा 115(2)/117(2)/351(2)/352 BNS दर्ज होना दिखा दिया गया। FIR स्टेटस में चार्जशीट और कोर्ट में मामला विचाराधीन लिख दिया गया।



FIR की कॉपी ने खोली पुलिस की पोल
जांच में सबसे बड़ा झोल सामने आया। चरित्र प्रमाण-पत्र पर पता बसालतपुर है, जबकि FIR 384/2024 की NCRB कॉपी के कॉलम 7 में आरोपी अंकित पुत्र महेश्वरी का पता उसकापुर मौजा रुदौलिया, कर्नलगंज, गोंडा दर्ज है।
यानी एक बसालतपुर का रहने वाला है, दूसरा रुदौलिया का। थाना भले एक ही हो, लेकिन गांव, मौजा और पूरा पता अलग है। पुलिस ने CCTNS सॉफ्टवेयर में सिर्फ नाम सर्च कर बिना पिता के पूरे विवरण, बिना आधार कार्ड, बिना घर के सत्यापन के दूसरे के अपराध को निर्दोष के माथे मढ़ दिया।
सिस्टम की लापरवाही का जीता-जागता नमूना
यह थाना स्तर से लेकर LIU और DCRB तक की संयुक्त लापरवाही है। बिना मौके पर सत्यापन किए ही रिपोर्ट लगा दी गई। चरित्र प्रमाण-पत्र युवाओं के लिए सरकारी नौकरी, पुलिस भर्ती, पासपोर्ट का सबसे अहम दस्तावेज है। ऐसे में एक गलती पूरा करियर तबाह कर सकती है।
पीड़ित युवक ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक गोंडा से मांग की है कि उसकी नौकरी का भविष्य देखते हुए तत्काल गलत प्रविष्टि हटाकर मूल क्लीन चरित्र प्रमाण-पत्र बहाल किया जाए और लापरवाह कर्मियों पर कार्रवाई हो।
