
ट्रैक्टर की आवाज सुनते ही आक्रामक हो जाता था बंदर, स्टेयरिंग तक पहुंचकर चालकों पर करता था हमला; दो दर्जन से अधिक लोगों को घायल करने की चर्चा

हसनी की रेस्क्यू टीम ने जाल बिछाकर पकड़े बंदर, टीम प्रमुख हकीम उर्फ हकीमुल्लाह के नेतृत्व में चलाया गया अभियान
संतकबीरनगर। नगर पंचायत धर्मसिंहवा क्षेत्र में लंबे समय से आतंक का पर्याय बने खूंखार बंदर समेत कुल 16 बंदरों को गुरुवार सुबह रेस्क्यू टीम ने पकड़ लिया। नगर पंचायत के वार्ड नंबर 14 स्थित गौरी राई में चलाए गए अभियान के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की उम्मीद जताई है। बंदरों को पकड़ने के लिए जनपद बस्ती के ग्राम हसनी, पोस्ट बांसखोर कला की रेस्क्यू टीम पहुंची थी। टीम प्रमुख हकीम उर्फ हकीमुल्लाह के नेतृत्व में सदस्यों ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाकर बंदरों को पकड़ा।
धर्मसिंहवा नगर पंचायत के विभिन्न वार्डों और बाजार क्षेत्र में बंदरों के आतंक से लोग लंबे समय से परेशान थे। इनमें सबसे अधिक दहशत एक खूंखार बंदर को लेकर थी, जो विशेष रूप से ट्रैक्टर चालकों के लिए मुसीबत बना हुआ था। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर की आवाज सुनते ही बंदर सतर्क होकर आक्रामक हो जाता था और ट्रैक्टर की ओर दौड़ पड़ता था। कई बार वह ट्रैक्टर की स्टेयरिंग तक पहुंच जाता था, जिससे चालकों को परेशानी के साथ दुर्घटना का खतरा भी बना रहता था। स्थानीय स्तर पर चर्चा थी कि यह बंदर अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों को घायल कर चुका था।
बंदर के आक्रामक व्यवहार से परेशान ट्रैक्टर चालक भी अपनी सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने लगे थे। कई चालक ट्रैक्टरों पर जाली लगाकर चलते थे, जबकि कुछ लोग एहतियात के तौर पर अपने साथ लाठी-डंडे भी रखते थे। ट्रैक्टर की आवाज सुनते ही बंदर के सक्रिय हो जाने और अचानक ट्रैक्टर पर पहुंचने की आशंका से चालकों में भय बना रहता था। वहीं, नगर पंचायत के अन्य वार्डों में भी बंदरों के आतंक से लोग परेशान थे। बंदरों के हमले की आशंका के चलते लोगों ने नगर पंचायत प्रशासन सहित संबंधित अधिकारियों से उन्हें पकड़वाने की मांग की थी।
लोगों की परेशानी को देखते हुए गुरुवार सुबह वार्ड नंबर 14 के गौरी राई में रेस्क्यू अभियान चलाया गया। इसमें ग्राम हसनी, पोस्ट बांसखोर कला, जनपद बस्ती की टीम ने खूंखार बंदर समेत कुल 16 बंदरों को पकड़ने में सफलता हासिल की। टीम प्रमुख हकीम उर्फ हकीमुल्लाह के नेतृत्व में चलाए गए अभियान में माजिद, रहीस, अशरफ, तुफैल, गूंगा, बांके और मजीबुद्दीन सहित टीम के अन्य सदस्य शामिल रहे।
खाने-पीने की चीजों का इस्तेमाल कर जाल में फंसाए गए बंदर
रेस्क्यू टीम के सदस्यों ने बताया कि बंदरों और लंगूरों को पकड़ने के लिए जाल में खाने-पीने की चीजें रखी जाती हैं। इसके बाद उन्हें जाल के निर्धारित दायरे में आने दिया जाता है। जैसे ही बंदर जाल के भीतर पहुंचते हैं, टीम के सदस्य रस्सी खींचकर जाल बंद कर देते हैं। इस तरीके से उन्हें पकड़कर रेस्क्यू किया जाता है। टीम ने इसी प्रक्रिया का इस्तेमाल करते हुए धर्मसिंहवा के गौरी राई में अभियान चलाया और कुल 16 बंदरों को पकड़ा।
रेस्क्यू के बाद लोगों को राहत की उम्मीद
धर्मसिंहवा नगर पंचायत क्षेत्र में बंदरों का आतंक लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ था। खासकर खूंखार बंदर की गतिविधियों से ट्रैक्टर चालकों में भय का माहौल था।नगरवासियों का कहना है कि बंदरों को पकड़ने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। गुरुवार को चलाए गए अभियान में 16 बंदरों के पकड़े जाने से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों को आशा है कि इस कार्रवाई के बाद बंदरों के हमलों की घटनाओं में कमी आएगी और नगर पंचायत क्षेत्र में आमजन के साथ ही ट्रैक्टर चालकों को भी राहत मिलेगी।
