नई तहसील और कोतवाली परिसर में बंदरों का जखीरा, महिला कांस्टेबल समेत एसआई भी हो चुके हैं हमले का शिकार

अलीगंज क्षेत्र में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि लोग रास्तों से गुजरते समय यह सोचने को मजबूर हैं कि कहीं अचानक बंदरों का झुंड हमला न कर दे। बंदरों के डर से कई लोग रास्ता बदलकर निकल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर आए दिन उग्र होकर राहगीरों पर हमला कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ हनई तहसील और कोतवाली परिसर में इन दिनों बंदरों का जखीरा लोगों के लिए परेशानी का बड़ा कारण बना हुआ है।
बंदरों के झुंड जगह-जगह घूमते रहते हैं और राहगीरों को देखते ही कई बार हमलावर हो जाते हैं। सबसे अधिक चिंता बच्चों और बुजुर्गों को लेकर बनी हुई है। अभिभावक बच्चों को अकेले बाहर भेजने से भी बच रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक पिछले चार दिनों के भीतर बंदर करीब 10 लोगों को काटकर घायल कर चुके हैं।
बंदरों के हमले में दो महिला कांस्टेबल कुमारी अंशुल और कुमारी साक्षी भी घायल हो चुकी हैं। इसके अलावा उप निरीक्षक धनपाल पर भी बंदर ने हमला कर उन्हें जख्मी कर दिया। लगातार हो रही घटनाओं से लोगों में बंदरों को लेकर दहशत बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि बंदरों के आतंक की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। न बंदरों को पकड़ने के लिए अभियान चलाया गया और न ही इस समस्या को लेकर कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई दे रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचाया गया तो किसी बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि तहसील और कोतवाली जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी यदि लोगों को बंदरों के हमले का डर बना रहे तो यह गंभीर चिंता का विषय है। बंदरों के झुंड के कारण राहगीरों के साथ-साथ सरकारी कर्मचारियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उप जिलाधिकारी डॉ. शशि शेखर ने बताया कि बंदरों की समस्या के संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी कृष्णकांत सरल को प्रकरण अग्रेषित किया गया है। जल्द ही बंदरों के आतंक से लोगों को निजात दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
