तृषा सिंह के असामयिक निधन ने मेरे अपने जख्म फिर हरे कर दिए — एक पिता होने के नाते दीपिका पांडेय सिंह के दुःख को महसूस कर रहा हूं

रांची, 24 सितंबर 2026।
झारखंड सरकार की ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह की सुपुत्री तृषा सिंह के सड़क दुर्घटना में हुए असामयिक निधन की हृदयविदारक खबर से मैं स्तब्ध और अत्यंत मर्माहत हूं। इतनी कम उम्र में एक बेटी का इस तरह अचानक दुनिया से चले जाना किसी भी माता-पिता के लिए ऐसा दुःख है, जिसे शब्दों में बयान करना संभव नहीं।
एक बेटी का जाना केवल एक जीवन का अंत नहीं होता, बल्कि माता-पिता के सपनों, उम्मीदों और जीवन के एक बड़े हिस्से का अचानक छिन जाना होता है।
मैं स्वयं अपनी बेटी विजयश्री नायक को असमय खोने का असहनीय दर्द झेल चुका हूं। 19 सितंबर 2026 को मेरी बेटी के निधन ने मेरे जीवन में जो गहरा खालीपन पैदा किया है, उसे मैं आज भी महसूस कर रहा हूं। इसलिए तृषा के निधन की खबर ने मेरे उस दर्द को एक बार फिर ताजा कर दिया है।
मैं उस पीड़ा को महसूस कर सकता हूं, जब घर में बेटी की आवाज हमेशा के लिए खामोश हो जाए, उसकी हंसी केवल यादों में रह जाए और माता-पिता की आंखें उसे तलाशती रह जाएं।
बेटी की अर्थी को कंधा देने का दर्द किसी भी माता-पिता के लिए जीवन का सबसे कठिन क्षण होता है। इस पीड़ा के सामने बड़े से बड़ा शब्द भी छोटा पड़ जाता है।
इस अत्यंत दुःखद घड़ी में मैं श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह एवं उनके पूरे परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना और आत्मीय शोक प्रकट करता हूं।एक बेटी को खोने के इस असहनीय दुःख में मैं स्वयं को उनके परिवार के साथ खड़ा पाता हूं।
ईश्वर दिवंगत तृषा सिंह की आत्मा को शांति प्रदान करें तथा उनकी मां, पिता और परिवार के सभी सदस्यों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति दें।
आज एक मां ने अपनी बेटी खोई है, और एक पिता ने अपनी बेटी खोने का दर्द फिर महसूस किया है।
ॐ शांति।
