100 वर्ष की उम्र में घर पर ली अंतिम सांस, पार्टी पदाधिकारियों और परिजनों में शोक की लहर

एटा। अलीगंज कस्बे के रहने वाले जनसंघ एवं भाजपा के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे डॉ. परसादीलाल कश्यप का रविवार देर शाम करीब छह बजे उनके आवास पर निधन हो गया। वह करीब 100 वर्ष के थे। उनके निधन की सूचना उनकी बड़ी बेटी डॉ. अर्जुन सिंह ने दी। निधन की खबर से परिजनों, भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्टी पदाधिकारियों में शोक की लहर दौड़ गई।
डॉ. परसादीलाल कश्यप ने जनसंघ के शुरुआती दौर में पार्टी के लिए सक्रिय रूप से कार्य किया। बताया जाता है कि उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों से प्रेरित होकर जनसंघ के आंदोलनों में भाग लिया था।

परिजनों के अनुसार, करीब 22 वर्ष की उम्र में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उनकी मुलाकात पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई थी। दोनों नेताओं के संबोधन से प्रभावित होकर उन्होंने जनसंघ के आंदोलन से जुड़ने का निर्णय लिया।
बताया गया कि ‘एक विधान, एक संविधान’ के समर्थन में चलाए गए आंदोलन के दौरान डॉ. कश्यप ने घर छोड़कर जम्मू-कश्मीर का रुख किया। कठिन परिस्थितियों और लंबी पैदल यात्रा के बाद वह कठुआ पहुंचे, जहां उन्हें कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। परिजनों का दावा है कि आंदोलन के दौरान उन्हें प्रताड़नाओं का भी सामना करना पड़ा और उन्होंने लंबे समय तक जेल में रहकर आंदोलन में योगदान दिया।
जेल से रिहा होने के बाद भी डॉ. कश्यप पार्टी की गतिविधियों से जुड़े रहे और जनसंघ से लेकर भाजपा तक संगठन के लिए समर्पित होकर कार्य करते रहे। करीब एक सदी के जीवनकाल के बाद उनके निधन को पार्टी और सामाजिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
उनके निधन की खबर मिलते ही घर पर शोक जताने वालों का तांता लग गया। भाजपा कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
दिलीप सिंह
मंडल ब्यूरो, एटा
