संतकबीरनगर। नगर पंचायत धर्मसिंहवा की लगभग 25 हजार की आबादी आज भी बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के गंभीर अभाव का सामना कर रही है। क्षेत्र में न तो सरकारी अस्पताल है और न ही कोई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जिसके कारण स्थानीय लोगों को सामान्य बीमारी से लेकर आपातकालीन स्थिति तक में भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। अचानक तबियत बिगड़ने या दुर्घटना होने पर मरीजों को मजबूरी में 40 किलोमीटर दूर सिद्धार्थनगर, 45 किलोमीटर दूर संतकबीरनगर जिला अस्पताल तथा 70 किलोमीटर दूर गोरखपुर तक जाना पड़ता है। लंबी दूरी और उपचार में विलंब के कारण कई बार मरीजों की हालत बेहद गंभीर हो जाती है, जिससे अनहोनी की आशंका बढ़ जाती है।
वार्ड नंबर 9 की सभासद अर्चना अग्रहरी ने बताया कि धर्मसिंहवा में अस्पताल की आवश्यकता को लेकर कई बार क्षेत्रीय विधायक और सांसद को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। उनका कहना है कि धरातल पर किसी भी प्रकार की कार्यवाही शुरू होती दिखाई नहीं देती, जबकि बढ़ती आबादी को देखते हुए यहां स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना अनिवार्य है। इसी तरह सभासद यशोदा देवी, चमेली देवी, समाजसेवी पवन जायसवाल, आशुतोष गिरी उर्फ फौजी भैया, बृजेश चंद्र त्रिपाठी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य कैलाश नाथ वर्मा, वीरेन्द्र पाण्डेय सहित अन्य नागरिकों ने भी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।
स्थानीय निवासियों ने सवाल उठाया कि आखिर धर्मसिंहवा की हजारों की आबादी कब तक 40 से 70 किलोमीटर दूर इलाज के लिए भटकती रहेगी और कब तक लोग इलाज के अभाव में अपनी जान गंवाने के खतरे से जूझते रहेंगे। उन्होंने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि धर्मसिंहवा में तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, मिनी हॉस्पिटल तथा 24×7 आपातकालीन सेवा स्थापित की जाए, ताकि किसी भी व्यक्ति की जान सिर्फ समय पर उपचार न मिल पाने के कारण जोखिम में न पड़े।
