नौनिहालों की सुरक्षा से खिलवाड़ पर ‘ब्रेक’, अलीगंज में 3 स्कूली वाहन पकड़े

दो बिना फिटनेस दौड़ रहे थे, एक के पास परमिट तक नहीं था; एआरटीओ शिवम यादव ने काटे चालान, संचालकों को दी दो टूक हिदायत। 1लाख 60रुपए की चालान राशि वसूली

अलीगंज स्कूली वाहनों में सफर करने वाले नन्हे-मुन्नों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग अब सख्त मोड में है। शासन के *‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’* अभियान के तहत मंगलवार को अलीगंज तहसील क्षेत्र में परिवहन विभाग ने स्कूली वाहनों की धरपकड़ शुरू कर दी।

एआरटीओ शिवम यादव की जांच में तीन स्कूली वाहन नियमों की कसौटी पर फेल मिले। इनमें दो वाहन बिना फिटनेस और एक बिना परमिट संचालित पाया गया। तथा एक डंपर ट्रक सहित तीनों के चालान कर अलीगंज थाना परिसर में खड़े करवा दिए। परिवहन विभाग ने लगभग ₹1लाख हजार चालान की राशि वसूली।

कार्रवाई के दौरान विभाग ने साफ कर दिया कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में अब ‘चलता है’ वाला रवैया नहीं चलेगा। वाहन की फिटनेस और परमिट महज कागजी औपचारिकताएं नहीं, बल्कि सड़क पर बच्चों की जिंदगी से जुड़ी जरूरी शर्तें हैं। एआरटीओ ने संबंधित वाहन संचालकों को जल्द से जल्द फिटनेस और परमिट की प्रक्रिया पूरी कराने की सख्त हिदायत दी।

शासन ने तय की 15 दिन की ‘सेफ्टी वॉच’

स्कूली वाहनों से जुड़ी दुर्घटनाओं के बाद शासन ने 11 से 25 अगस्त तक 15 दिवसीय ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जिलेभर में स्कूल बस, वैन और बच्चों के आवागमन में इस्तेमाल होने वाले अन्य वाहनों की जांच की जाएगी।

अभियान में सिर्फ वाहन की फिटनेस ही नहीं, बल्कि परमिट, सुरक्षा मानक, चालक की क्षमता, स्वास्थ्य और नेत्र परीक्षण तथा चरित्र सत्यापन तक को जांच के दायरे में रखा गया है।

बार-बार नोटिस के बाद भी फिटनेस नहीं तो और बड़ी कार्रवाई

शासन ने ऐसे स्कूली वाहनों पर भी सख्ती के निर्देश दिए हैं, जिन्हें फिटनेस कराने के लिए बार-बार नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वाहन सड़क पर दौड़ते मिले। ऐसे मामलों में नियमानुसार पंजीयन निलंबन की कार्रवाई तक की जाएगी। गंभीर लापरवाही वाले स्कूलों को चिह्नित कर उनकी सूची संबंधित अधिकारियों को भेजने के भी निर्देश हैं।

बच्चे बैठे हों तो पहले उन्हें सुरक्षित पहुंचाया जाए

अभियान में प्रवर्तन अधिकारियों के लिए एक अहम मानवीय निर्देश भी दिया गया है। स्कूली वाहन में बच्चे सवार हों तो उस समय वाहन को रोककर कार्रवाई नहीं की जाएगी। पहले बच्चों को सुरक्षित स्कूल या गंतव्य तक पहुंचाया जाएगा, इसके बाद वाहन के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई की जाएगी।

पुराने और जर्जर वाहनों पर भी नजर

विभाग की निगाह उन स्कूली वाहनों पर भी है, जो निर्धारित आयु सीमा पूरी करने के बाद भी बेहद खराब हालत में बच्चों को ढो रहे हैं। इसके अलावा नशे में वाहन चलाने वाले चालकों के खिलाफ वाहन निरुद्ध करने और ड्राइविंग लाइसेंस निलंबन जैसी कार्रवाई के निर्देश हैं।

अलीगंज की कार्रवाई ने दिया साफ संदेश

अलीगंज में तीन वाहनों पर हुई कार्रवाई से साफ है कि ‘मिशन सेफ फ्यूचर 2.0’ अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहेगा। परिवहन विभाग ने धरातल पर जांच शुरू कर दी है। बच्चों को स्कूल पहुंचाने वाले वाहनों में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे की वजह बन सकती है। ऐसे में फिटनेस और परमिट की अनदेखी करने वाले संचालकों पर कार्रवाई नौनिहालों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम मानी जा रही है।

सीधा संदेश—स्कूल वाहन बच्चों को लेकर सड़क पर उतरेगा तो फिटनेस, परमिट और सुरक्षा मानक पूरे करने ही होंगे। दिलीप सिंह अलीगज एटा

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