मेले में अवैध वसूली के वीडियो वायरल होने के बाद उठे सवाल, सोशल मीडिया पर प्रशासन घिरा
दावा था- वसूली से होती है घाट की व्यवस्था, हकीकत में विसर्जन के दिन भी बिजली गुल

संवाददाता गोंडा
करनैलगंज, गोण्डा। क्षेत्र के ऐतिहासिक कटरा घाट पर प्रशासनिक अव्यवस्था उजागर हुई है। शनिवार को गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के दिन घाट पर बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी, जिससे पूरा घाट अंधेरे में डूबा रहा और श्रद्धालुओं को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में विसर्जन करना पड़ा। इस घटना के बाद घाट मेले में दुकानदारों से हो रही कथित अवैध वसूली के दावों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर स्थानीय निवासी हर्षित सिंह “समाजसेवी” द्वारा फेसबुक पर की गई पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें घाट की व्यवस्थाओं और वसूली को लेकर प्रशासन से जवाब मांगा गया है।
कटरा घाट पर प्रशासन की लापरवाही उजागर! बिजली गुल होने से मोबाइल टॉर्च के सहारे हुआ गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन..
कटरा घाट मेले में अव्यवस्थाओं और कथित अवैध वसूली के वीडीओ वायरल होने पर स्वत: ही सफाई दी गई पर आज गणेश जी की मूर्ति विसर्जन का दिन था, लेकिन बिजली की व्यवस्था न होने के कारण पूरा कटरा घाट अंधकारमय रहा।

कल बताया गया था कि दुकानदारों से की जाने वाली वसूली से घाट की व्यवस्थाएँ की जाती हैं। आज की स्थिति देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि ये दावे कितने सच हैं। कहा गया कि जमीन दान में दी गई है। लेकिन सवाल यह है कि क्या जमीन दान करने का मतलब यह है कि दुकानदारों से मनमाने तरीके से, बिना किसी निर्धारित दर के, वसूली की जाए? घाट पर साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सामान्यतः नगर पालिका करनैलगंज अथवा बड़े मेलों के दौरान नगर पालिका और ग्राम पंचायत के सहयोग से प्रशासनिक स्तर पर की जाती है।
जहाँ तक जमीन का सवाल है, किसी के जमीन दान करने या जमीन का मालिक होने मात्र से वहाँ आने वाले दुकानदारों से वसूली करने का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं हो जाता। इसके लिए संबंधित नियमों और प्रशासनिक अनुमति का पालन आवश्यक है। विकास कार्य विधायक निधि और नगर पालिका करनैलगंज के माध्यम से होते हैं। लेकिन सवाल यह है कि विकास और व्यवस्थाओं के नाम पर वसूली कौन कर रहा है? और उस धन का उपयोग कहां हो रहा है?
