मिहींपुरवा/बहराइच। बलहा विधानसभा क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था को लेकर लोगों का आक्रोश अब आंदोलन में बदल गया है। मिहींपुरवा बिजली उपकेंद्र से जुड़ी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर पहले 8 अगस्त को तहसील परिसर में व्यापक प्रदर्शन किया गया था। लिखित आश्वासन के बावजूद अपेक्षित सुधार न होने का आरोप लगाते हुए अब 30 अगस्त से अनिश्चितकालीन आमरण अनशन शुरू कर दिया गया है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में उर्रा पावर हाउस की बहाली, नियमित एवं पर्याप्त विद्युत आपूर्ति, लो-वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान और बार-बार होने वाली विद्युत बाधाओं से निजात शामिल है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की अनियमित आपूर्ति का सीधा असर आम जनजीवन, बच्चों की पढ़ाई, कारोबार और कृषि कार्यों पर पड़ रहा है। भीषण गर्मी में पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।

8 अगस्त को मिला था लिखित आश्वासन
विद्युत व्यवस्था को लेकर 8 अगस्त को हुए आंदोलन के बाद जेई नानपारा की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया था। इसमें लो-वोल्टेज सहित अन्य विद्युत समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। आश्वासन में 15 अगस्त तक लो-वोल्टेज की समस्या के समाधान का प्रयास किए जाने की बात कही गई थी।

आंदोलनकारियों का आरोप है कि निर्धारित समय बीतने के बाद भी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इसी के चलते अब आमरण अनशन का रास्ता अपनाया गया है।
सवालों के घेरे में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली
लिखित आश्वासन के बावजूद यदि समस्या जस की तस बनी हुई है तो 15 अगस्त तक समाधान के आश्वासन का क्या हुआ? क्या उर्रा पावर हाउस की बहाली को लेकर विभाग ने कोई ठोस कार्ययोजना बनाई है? क्या मिहींपुरवा उपकेंद्र से जुड़े गांवों को निर्धारित रोस्टर के अनुसार पर्याप्त बिजली मिल रही है? और सबसे बड़ा सवाल—आखिर क्षेत्रवासियों को नियमित बिजली के लिए आंदोलन और आमरण अनशन का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?
अब देखना होगा कि विद्युत विभाग और प्रशासन इन सवालों का जवाब कार्रवाई के जरिए कब तक देते हैं। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया है कि समस्याओं का स्थायी समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

