सीएम आवास पर आत्मदाह की धमकी का असर: धर्मसिंहवा पुलिस ने 14 लोगों के खिलाफ दर्ज किया मुकदमा

न्याय की गुहार अनसुनी होने पर सभासद प्रतिनिधि ने दी थी आत्मदाह की चेतावनी; शासन के संज्ञान के बाद दर्ज हुई FIR

संतकबीरनगर। न्याय पाने के लिए स्थानीय पुलिस की चौखट पर ठोकरें खाने और निराश होने के बाद, नगर पंचायत धर्मसिंहवा के एक सभासद प्रतिनिधि द्वारा मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह की चेतावनी दिए जाने का बड़ा असर हुआ है। इस गंभीर चेतावनी ने पुलिस-प्रशासन को झकझोर दिया, जिसके बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कुल 14 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।
आत्मदाह की चेतावनी ने दिलाई कार्रवाई
मामला धर्मसिंहवा के वार्ड नंबर 13 निवासी सभासद प्रतिनिधि महेश वर्मा से जुड़ा है। महेश वर्मा का आरोप था कि उनके विरोधियों ने साजिशन उनके और उनके परिवार के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया था। न्याय के लिए उन्होंने धर्मसिंहवा थाना पुलिस से बार-बार गुहार लगाई, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पुलिस की निष्क्रियता से हताश होकर, महेश वर्मा ने 11 अक्टूबर 2025 को राज्यपाल, मुख्यमंत्री, डीजीपी और एडीजीपी गोरखपुर को एक पत्र भेजा। इस पत्र में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि 27 अक्टूबर 2025 तक उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास के सामने अपने परिवार समेत आत्मदाह कर लेंगे।
शीर्ष स्तर पर शिकायत पहुंची और पुलिस हरकत में आई
आत्मदाह की यह गंभीर चेतावनी और शिकायत की प्रतिलिपि जैसे ही शासन स्तर तक पहुंची, उच्चाधिकारियों ने तुरंत इसका संज्ञान लिया। जिला स्तर पर पुलिस-प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए देर रात कार्रवाई की।
थानाध्यक्ष अभिमन्यु सिंह ने बताया कि 18 अक्टूबर 2025 की रात 10 बजे, महेश वर्मा की तहरीर पर 14 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। उन्होंने कहा कि मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है और सभी आरोपों की गहन जांच की जाएगी।
इन लोगों पर दर्ज हुआ केस
महेश वर्मा की तहरीर पर संतोष वर्मा, सूर्य कुमार उर्फ बबलू वर्मा, राज कुमार वर्मा, राजेश तिवारी, आदित्य, नंदनी, पलक, सीमा, माया, जतिन वर्मा, मनीष वर्मा, तारकेश्वर, सोनू वर्मा (निवासी राजेडिहा) और अताउल्लाह (निवासी सेवाइचपार) सहित 14 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 191(2), 115(2), 352, 351(3), 324(4), व 333 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया है।
एफआईआर दर्ज होने के बाद महेश वर्मा ने राहत की सांस ली है। उन्होंने कहा, “हम सिर्फ न्याय की मांग कर रहे थे। अगर पुलिस शुरू में ही कार्रवाई कर देती, तो इतना बड़ा कदम उठाने की नौबत नहीं आती।”

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