एक गुट ने न्यायालय की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, दूसरा बोला कामकाज रहेगा जारी
अलीगंज। अलीगंज में बार एसोसिएशन क़े एक गुट क़े अधिवक्ताओं द्वारा एसडीएम कोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन बहिष्कार पर उतर आया है, जबकि दूसरे गुट ने इन आरोपों से दूरी बनाते हुए न्यायिक कार्यों को सामान्य रूप से जारी रखने का निर्णय लिया है।
बार एसोसिएशन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार एसडीएम न्यायालय अलीगंज में कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में बिना पर्याप्त प्रक्रिया के जमानत दी जा रही है, आदेशों में पारदर्शिता की कमी है तथा कथित रूप से धन लेन-देन जैसी अनियमितताएं हो रही हैं। विज्ञप्ति में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में बिना समुचित बहस सुने आदेश पारित किए जा रहे हैं और राजस्व संहिता की धाराओं में भी कथित तौर पर धन लेकर कार्य किए जाने के आरोप हैं।

इन बिंदुओं को आधार बनाकर अधिवक्ताओं के एक गुट ने न्यायिक कार्यों के बहिष्कार का निर्णय लिया है। हालांकि बार एसोसिएशन क़े अधिवक्ताओं का दूसरा गुट इस निर्णय से सहमत नहीं है। उनका कहना है कि यह सामूहिक निर्णय नहीं है और न्यायालय के कार्यों को बाधित करना उचित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नियमित रूप से अपने कार्य करते रहेंगे। बताया जा रहा है कि हाल ही में शांति भंग की आशंका में किए गए चालान और उसमें दी गई जमानत इस विवाद की मुख्य वजह बनी है। एक पक्ष जमानत प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है, जबकि प्रशासन ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
अध्यक्ष महेंद्र सिंह शाक्य नें बताया कि एसडीएम न्यायालय की कार्यप्रणाली में गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। बिना उचित प्रक्रिया के जमानत देना, पारदर्शिता की कमी और कथित धन लेन-देन के विरोध में हम अनिश्चितकालीन बहिष्कार कर रहे हैं।
अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा नें कहा कि बहिष्कार का निर्णय सभी अधिवक्ताओं का नहीं है। हमारा गुट न्यायालय के कार्यों को बाधित करने के पक्ष में नहीं है। यदि कोई शिकायत है तो उसे विधिक तरीके से उठाया जाना चाहिए। न्यायिक कार्य सामान्य रूप से जारी रहेंगे।
एसडीएम अलीगंज, जगमोहन गुप्ता नें जानकारी देते हुए बताया कि न्यायालय में सभी कार्य विधिक प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं। हाल ही में शांति भंग के मामले में विधिवत दस्तावेजों के आधार पर ही जमानत दी गई है। लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं।
दिलीप सिंह मंडल ब्योरों एटा उत्तर प्रदेश
