जिले में धड़ल्ले से बिक और इस्तेमाल हो रही प्रतिबंधित पालीथिन,जिम्मेदार अफसर मौन

पालीथिन निगल रही बेजुबान गायों की जान,प्रशासन बना मूकदर्शक

गोण्डा। जनपद में प्रतिबंध के बावजूद पालीथिन और प्लास्टिक का कारोबार खुलेआम जारी है। शहरी बाजारों से लेकर ग्रामीण अंचलों तक प्रतिबंधित पालीथिन की बिक्री और उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार विभाग और अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं। इसका दुष्परिणाम पर्यावरण के साथ-साथ बेजुबान पशुओं, विशेषकर गायों की जान पर भारी पड़ रहा है ।

ग्रामीण क्षेत्रों में कई व्यापारी कुटीर उद्योग की तरह बड़े पैमाने पर पालीथिन बेच रहे हैं, जबकि जनपद मुख्यालय पर कुछ बड़े कारोबारी छोटे दुकानदारों को इसकी सप्लाई कर रहे हैं। लोगों की कई शिकायतों के बावजूद अब तक किसी बड़े विक्रेता पर ठोस कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।

पालिथीन पर प्रतिबंध का आदेश कागजों तक सीमित

जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन के सख्त निर्देशों के बावजूद कार्रवाई केवल औपचारिक साबित हुई है। कुछ समय पहले हुई छापेमारी और जुर्माना अब असरहीन नजर आ रहे हैं। मौजूदा स्थिति यह है कि मुख्यालय से अधिक ग्रामीण इलाकों में पालीथिन का कारोबार फल-फूल रहा है।

मुख्यमंत्री के आदेश की अनदेखी-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 14 जुलाई 2018 को पालीथिन पर सख्त प्रतिबंध के आदेश दिए गए थे, लेकिन गोण्डा में इनका पालन होता नहीं दिख रहा। न नियमित अभियान चल रहे हैं और न ही बड़े विक्रेताओं पर कार्रवाई।

पर्यावरण और पशु जीवन पर संकट

पालीथिन से नालियां जाम होती हैं, मच्छरों का प्रकोप बढ़ता है और डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियां फैलती हैं। प्लास्टिक में मौजूद जहरीले रसायन मानव स्वास्थ्य के लिए भी घातक हैं। जूठे खाद्य पदार्थों में लिपटी पालीथिन को गायें खा लेती हैं, जिससे उनके पेट में पालीथिन जमा हो जाती है और उनकी दर्दनाक मौत हो जाती है।
पालीथिन जलाने से CO₂ और CO जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरनाक हैं।

क्या कहता है कानून-
50 माइक्रोन से कम पालीथिन पूर्णतः प्रतिबंधित।
100 ग्राम तक पर ₹500 चालान।
5 किलो से अधिक पर ₹25,000 से ₹2 लाख तक जुर्माना।
पालीथिन जब्ती अनिवार्य।
बार-बार उल्लंघन पर 6 माह तक जेल व ₹1 लाख जुर्माना।
IPC की धारा 188 के तहत मुकदमा।
आखिर कब जागेगा प्रशासन?
कुछ लोगों की मुनाफाखोरी के चलते पर्यावरण और बेजुबान पशुओं की जान खतरे में है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन पालीथिन माफियाओं पर कठोर कार्रवाई करता है या फिर गायों की मौत और पर्यावरण की बर्बादी यूं ही होती रहेगी।

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