काग़ज़ों में 200 मिमी, ज़मीन पर 80–100 मिमी मोटाई; घटिया सामग्री व बिना क्योरिंग निर्माण
गोंडा। कर्नलगंज नगर पालिका परिषद क्षेत्र के मोहल्ला बजरंगनगर (मेहदीहाता) में हाल ही में निर्मित आरसीसी सड़क अब विकास कार्य कम और कथित भ्रष्टाचार का उदाहरण अधिक प्रतीत हो रही है। सड़क निर्माण में गंभीर तकनीकी व वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, जिससे नगर पालिका की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, आरसीसी सड़क निर्माण में मानकों की खुली अनदेखी की गई है। काग़ज़ों में सड़क की मोटाई 200 मिमी दर्शाई गई है, जबकि मौके पर केवल 80 से 100 मिमी मोटी आरसीसी परत पाई गई।
आरोप है कि निर्माण कार्य में घटिया सीमेंट, गंदी बालू और खराब गिट्टी (एग्रीगेट) का उपयोग किया गया, वहीं ग्रेन्युलर सब-बेस (GSB) पूरी तरह गायब है। इसके अलावा आरसीसी डालने के बाद क्योरिंग न किए जाने का भी आरोप है, जिससे सड़क की मजबूती और आयु पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि आरसीसी सड़क निर्माण में निर्धारित मिक्स डिज़ाइन (M20/M30) का पालन न करना, सब-बेस की कमी, उचित कम्पैक्शन के बिना कंक्रीट डालना और क्योरिंग न करना भविष्य में सड़क के धंसने, फटने और टूटने का कारण बन सकता है।
साथ ही, सड़क की लेवलिंग व ढलान में खामियों के चलते जलभराव की आशंका भी जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इतनी बड़ी तकनीकी गड़बड़ियां जेई और ठेकेदार की मिलीभगत के बिना संभव नहीं हैं। माप पुस्तिका (एमबी) में फर्जी प्रविष्टियों, मौके पर निगरानी के अभाव और केवल काग़ज़ों में निरीक्षण किए जाने की भी चर्चा है।
लोगों का कहना है कि जनता के टैक्स के पैसों से बने विकास कार्य यदि कुछ ही महीनों में क्षतिग्रस्त हो जाएं, तो यह सीधे तौर पर जनधन की बर्बादी है। मामले को लेकर क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की तत्काल स्थलीय तकनीकी जांच और टीएससी (थर्ड पार्टी/तकनीकी समिति) जांच कराई जाए।
साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित जेई, एई और ठेकेदार के विरुद्ध एफआईआर, सरकारी धन की रिकवरी तथा दोषियों की ब्लैकलिस्टिंग की जाए। अब सवाल सिर्फ सड़क की गुणवत्ता का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है। देखना यह होगा कि शासन–प्रशासन इस गंभीर मामले पर कब और क्या कार्रवाई करता है।
