युवक को बंधक बनाकर मारपीट व जातिसूचक गालियां देने के मामले में पीड़ित पर ही कार्रवाई? कर्नलगंज पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

पीड़ित परिवार ने आईजी देवीपाटन परिक्षेत्र गोण्डा से न्याय की लगाई गुहार

गोंडा ।   कर्नलगंज नगर पालिका में सफाई व्यवस्था की शिकायत करना एक युवक को भारी पड़ता दिख रहा है। नगर पालिका परिसर में युवक को बंधक बनाकर मारपीट व जातिसूचक गालियां देने के आरोप के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि शिकायत से नाराज कुछ लोगों ने युवक को नगर पालिका कार्यालय परिसर में बंधक बनाकर मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं। इतना ही नहीं, मामले में कार्रवाई की मांग करने वाले पीड़ित का ही पुलिस ने शांति भंग की धाराओं में चालान कर दिया, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

कस्बा कर्नलगंज के मोहल्ला गांधी नगर निवासी रजनी कनौजिया पत्नी घनश्याम कनौजिया ने पुलिस को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 19 मई 2026 को उनके पति घनश्याम कनौजिया नगर पालिका परिषद कर्नलगंज में सफाई व्यवस्था की शिकायत करने गए थे। आरोप है कि वहां मौजूद आशीष सिंह, सुरभि पांडेय, अनुज जायसवाल, मोनू गुप्ता, पशुपति सिंह समेत अन्य लोगों ने उनके पति को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और गालियां देते हुए मेन गेट बंद कर उन्हें बंधक बना लिया तथा मारपीट की। घटना की सूचना तत्काल डायल 112 पुलिस को दी गई थी।

प्रार्थना पत्र में यह भी कहा गया है कि पीड़ित होने के बावजूद पुलिस घनश्याम कनौजिया को ही हिरासत में लेकर कोतवाली ले गई, जिससे पूरा परिवार भयभीत है। स्थानीय कोतवाली कर्नलगंज में सूचना दिए जाने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।

मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद Uttar Pradesh Police की ओर से एक्स (ट्वीटर) पर सार्वजनिक रूप से कहा गया था कि प्रकरण की जांच एवं आवश्यक वैधानिक कार्रवाई हेतु थाना कर्नलगंज पुलिस को निर्देशित किया गया है। लेकिन पीड़ित पक्ष का आरोप है कि उच्चाधिकारियों के निर्देशों को दरकिनार करते हुए कर्नलगंज पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बजाय उल्टे पीड़ित घनश्याम कनौजिया का ही शांति भंग की धाराओं में चालान कर दिया।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि नगर पालिका में अध्यक्ष प्रतिनिधि रामजी लाल के कार्यकाल में इससे पहले भी सरकारी कार्य में बाधा एवं एससी/एसटी एक्ट के मामलों का दबाव बनाकर उपयोग किए जाने के प्रयास हुए हैं। आरोप है कि एक पूर्व सभासद के खिलाफ भी हड़ताल कराकर इसी प्रकार मुकदमा दर्ज करवाने का प्रयास किया गया था, लेकिन मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के कारण मुकदमा दर्ज नहीं हो सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि आज तक किसी भी पालिका अध्यक्ष के कार्यकाल में इस प्रकार के विवाद सामने नहीं आए और वर्तमान अध्यक्ष प्रतिनिधि पर पद के दुरुपयोग के आरोप लग रहे हैं।

पीड़ित परिवार ने अब आईजी देवीपाटन परिक्षेत्र गोण्डा से न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट समेत अन्य संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर नगर क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल गर्म है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर शिकायतकर्ता को ही आरोपी की तरह क्यों पेश किया गया। अब देखना होगा कि उच्चाधिकारी इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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