बढ़ती महंगाई, गिरता रुपया और जनता पर आर्थिक हमलामोदी सरकार की नीतियों ने आम आदमी की कमर तोड़ी

विजय शंकर नायक, वरिष्ठ नेता, झारखण्ड कांग्रेस


भारत आज एक ऐसे आर्थिक दौर से गुजर रहा है जहाँ एक तरफ सरकार “विश्वगुरु” और “5 ट्रिलियन इकोनॉमी” का सपना दिखा रही है, वहीं दूसरी तरफ गरीब, किसान, मजदूर और मध्यम वर्ग महंगाई, बेरोजगारी और गिरती आय से त्रस्त हैं। टीवी और विज्ञापनों में विकास दिखाई देता है, लेकिन जमीन पर जनता की थाली छोटी होती जा रही है। मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों में रुपये की कीमत लगातार कमजोर हुई है, पेट्रोल-डीजल रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे, गैस सिलेंडर आम परिवार की पहुंच से बाहर हुआ और खाद्य पदार्थों की कीमतों ने गरीबों की जिंदगी संकट में डाल दी।


महंगाई ने रसोई से सम्मान तक छीन लिया


अप्रैल 2026 में खुदरा महंगाई (CPI) 3.48% बताई जा रही है, लेकिन असली महंगाई का दर्द आंकड़ों से कहीं ज्यादा बड़ा है। सरकारी आंकड़े गरीब की थाली का सच नहीं बताते। आज स्थिति यह है कि:- दाल, तेल, आटा, सब्जी और दूध की कीमतें पिछले वर्षों की तुलना में 20-40% तक बढ़ चुकी हैं। घरेलू गैस सिलेंडर ₹1100 के आसपास पहुंच चुका है।

पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाकर जनता से वसूली की जा रही है। गांवों में मजदूर की दिहाड़ी ₹300-400 है, लेकिन परिवार चलाने का खर्च दोगुना हो चुका है। एक गरीब परिवार की आय वहीं की वहीं है, लेकिन खर्च लगातार बढ़ रहा है। परिणाम यह है कि:- गरीब परिवार भोजन कम कर रहे हैं,बच्चों के दूध और पोषण में कटौती हो रही है, महिलाएं घर चलाने के लिए कर्ज लेने को मजबूर हैं, बुजुर्ग दवा छोड़कर गुजारा कर रहे हैं| यह सिर्फ आर्थिक संकट नहीं, बल्कि सामाजिक असमानता का विस्फोट है।


गिरता रुपया — सरकार की आर्थिक विफलता का प्रतीक
मई 2026 में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95-96 रुपये के स्तर तक पहुंच गया। 2014 में भाजपा सरकार बनने के समय डॉलर लगभग ₹58-60 के आसपास था। यानी मोदी सरकार के दौर में रुपया लगभग 35-40% कमजोर हुआ। भाजपा नेताओं ने कभी कहा था — “रुपया नहीं गिर रहा, देश की प्रतिष्ठा गिर रही है।” आज वही सवाल जनता सरकार से पूछ रही है। रुपये के कमजोर होने का असर सीधे गरीबों पर पड़ता है क्योंकि भारत:- कच्चा तेल आयात करता है, इलेक्ट्रॉनिक सामान आयात करता है , खाद और कई औद्योगिक कच्चे माल आयात करता है |

जब रुपया कमजोर होता है तो आयात महंगा हो जाता है और उसका बोझ जनता पर डाला जाता है। इसका परिणाम:- पेट्रोल-डीजल महंगा, ट्रांसपोर्ट महंगा, खेती महंगी, खाद्य वस्तुएं महंगी, दवाइयां महंगी,यानी हर संकट का अंतिम बोझ गरीब की जेब पर पड़ता है।
बेरोजगारी और महंगाई का डबल अटैक


देश का युवा आज दोहरी मार झेल रहा है —नौकरी नहीं और महंगाई लगातार बढ़ रही है। लाखों सरकारी पद खाली पड़े हैं, निजी क्षेत्र में स्थायी रोजगार घटे हैं, ठेका और अस्थायी रोजगार बढ़ा है, शिक्षित युवा छोटे-मोटे काम करने को मजबूर हैं, जब रोजगार नहीं होगा तो बाजार में खरीद क्षमता भी घटेगी। यही कारण है कि छोटे दुकानदार, रिक्शा चालक, किसान और मध्यम वर्ग सभी आर्थिक दबाव में हैं।
अमीर और गरीब के बीच खाई बढ़ी


मोदी सरकार के कार्यकाल में कुछ बड़े कॉर्पोरेट घरानों की संपत्ति कई गुना बढ़ी, जबकि गरीब और गरीब होता गया। किसानों की आय दोगुनी करने का वादा अधूरा रहा, MSP पर कानूनी गारंटी नहीं मिली, मजदूरों के श्रम अधिकार कमजोर किए गए, शिक्षा और स्वास्थ्य महंगे होते गए,सरकार बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ करती रही, लेकिन किसान के छोटे कर्ज पर नोटिस भेजे जाते हैं।


GDP का आंकड़ा जनता की भूख नहीं मिटाता
सरकार GDP वृद्धि दर 7% से अधिक होने का दावा करती है, लेकिन सवाल यह है कि उस विकास का लाभ किसे मिल रहा है? अगर विकास के बावजूद:- गरीब भूखा है, युवा बेरोजगार है,किसान कर्जदार है,मध्यम वर्ग EMI में दबा है,तो फिर यह विकास किसके लिए है?देश की अर्थव्यवस्था का वास्तविक मापदंड शेयर बाजार नहीं, बल्कि जनता की रसोई है।


कांग्रेस का दृष्टिकोण और समाधान
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस हमेशा ऐसी अर्थव्यवस्था की पक्षधर रही है जिसमें विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। समाधान स्पष्ट हैं:- पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम किया जाए, गैस सिलेंडर पर सब्सिडी बढ़ाई जाए, मनरेगा और ग्रामीण रोजगार मजबूत किया जाए, युवाओं के लिए स्थायी सरकारी भर्ती निकाली जाए,किसानों को MSP की कानूनी गारंटी मिले, छोटे व्यापारियों को टैक्स और बैंकिंग राहत दी जाए, शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकारी निवेश बढ़े|


आज भारत का आम नागरिक आर्थिक असुरक्षा के दौर से गुजर रहा है। महंगाई ने रसोई तोड़ी है, बेरोजगारी ने युवाओं का भविष्य छीना है और गिरते रुपये ने जीवन को और महंगा बना दिया है। सरकार विज्ञापनों और इवेंट मैनेजमेंट से अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं कर सकती। जब तक गरीब की थाली भरपूर नहीं होगी, किसान खुशहाल नहीं होगा और युवा रोजगार से जुड़ा नहीं होगा — तब तक विकास अधूरा रहेगा। देश की असली ताकत जनता है, और जनता का दर्द ही किसी सरकार की सबसे बड़ी परीक्षा होती है।
– विजय शंकर नायक
वरिष्ठ नेता, झारखण्ड कांग्रेस

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