आर्य समाज के मंच से कुरीतियों पर प्रहार, वैदिक संस्कृति के प्रचार का लिया संकल्प

तीन दिवसीय महोत्सव में गूंजे वैदिक मंत्र, नशामुक्त और संस्कारित समाज बनाने का संदेश

अलीगंज। अलीगंज के ग्राम किनौड़ी खैराबाद स्थित आर्य समाज मंदिर में आयोजित 27वें वार्षिकोत्सव एवं वैदिक जागरण महोत्सव का समापन रविवार को श्रद्धा, उत्साह और वैदिक परंपराओं के बीच संपन्न हुआ। तीन दिनों तक चले इस आयोजन में जहां यज्ञ की पवित्र अग्नि प्रज्ज्वलित रही, वहीं मंच से समाज में फैल रही कुरीतियों के खिलाफ जोरदार आवाज भी बुलंद की गई। वक्ताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि समाज को मजबूत और संस्कारित बनाना है तो मृत्युभोज, नशाखोरी, अंधविश्वास और पाखंड जैसी बुराइयों को जड़ से समाप्त करना होगा।

समापन दिवस पर आयोजित यज्ञ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ आहुतियां देकर राष्ट्र, समाज और मानव कल्याण की मंगलकामना की। यज्ञ के बाद हुई विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए वैदिक जीवन पद्धति को अपनाने पर बल दिया। मुख्य वक्ता सत्य प्रकाश शास्त्री ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने जिस उद्देश्य से आर्य समाज की स्थापना की थी, आज भी उसकी प्रासंगिकता बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त अंधविश्वास और पाखंड लोगों को सत्य से दूर कर रहे हैं। ऐसे में वैदिक ज्ञान ही वह प्रकाश है जो व्यक्ति को सही दिशा दिखा सकता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से बच्चों को धार्मिक नहीं बल्कि संस्कारित और चरित्रवान बनाने की अपील की। रामनरेश आर्य ने कहा कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसके बच्चों पर निर्भर करता है। यदि परिवार अपने बच्चों को अच्छे संस्कार, अनुशासन और नैतिक शिक्षा देगा तो समाज स्वतः ही स्वस्थ और सशक्त बनेगा।

उन्होंने कहा कि आधुनिक जीवनशैली के बीच भी भारतीय संस्कृति और वैदिक मूल्यों को जीवित रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वहीं ब्रजराज सिंह पुरोहित ने नशाखोरी को सामाजिक पतन का प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि शराब, तंबाकू और अन्य नशे युवाओं को बर्बादी की ओर धकेल रहे हैं। उन्होंने लोगों से नशे से दूरी बनाकर परिवार और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने मृत्युभोज जैसी सामाजिक कुप्रथा पर भी चिंता व्यक्त की। उनका कहना था कि दिखावे और सामाजिक दबाव के कारण कई परिवार आर्थिक बोझ तले दब जाते हैं। समाज को ऐसी परंपराओं से मुक्त कर सादगी और सदाचार की राह पर आगे बढ़ना चाहिए। तीन दिवसीय आयोजन में प्रतिदिन वैदिक यज्ञ, भजन, प्रवचन और सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए गए। श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लेकर वैदिक विचारधारा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की।

अंतिम दिन पूर्णाहुति के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया। कार्यक्रम संयोजक वेद प्रकाश ने सभी अतिथियों, विद्वानों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्य समाज केवल धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त आंदोलन है। उन्होंने कहा कि वैदिक विचारों को घर-घर पहुंचाने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए ऐसे आयोजन आगे भी निरंतर होते रहेंगे। समापन अवसर पर क्षेत्रीय श्रद्धालु और आर्य समाज के अनुयायी मौजूद रहे।

दिलीप सिंह मंडल ब्योरों एटा उत्तर प्रदेश

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