मानवता की मिसाल: चार मासूमों को निःशुल्क हृदय शल्य चिकित्सा हेतु तेलंगाना रवाना किया गया।

श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल : “नन्हा सा दिल” अभियान के अंतर्गत जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित चार बच्चों को शनिवार शाम 5:00 बजे टाटानगर जंक्शन से श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, कोंडापाका (तेलंगाना) के लिए सफलतापूर्वक रवाना किया गया। उक्त चारों बच्चे को श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, बिष्टुपुर (जमशेदपुर, पूर्वी सिंहभूम) से भेजे गए।

गौरतलब हो कि रवाना किए गए बच्चों में दो पलामू जिले से, एक सरायकेला-खरसावां से तथा एक पूर्वी सिंहभूम जिले से हैं। सभी बच्चों की पहचान विशेष स्क्रीनिंग एवं इकोकार्डियोग्राफी जांच के दौरान श्री सत्य साई संजीवनी मेडिकल टीम द्वारा की गई थी। विशेषज्ञ हृदय रोग चिकित्सकों द्वारा जिला एवं प्रखंड स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों पर विस्तृत जांच के उपरांत इन्हें शल्य चिकित्सा हेतु चयनित किया गया।

उपरोक्त संपूर्ण प्रक्रिया के अंतर्गत बच्चों के घर से अस्पताल तक आने-जाने की व्यवस्था, अभिभावकों के साथ यात्रा, आवास, भोजन, दवाइयां तथा ऑपरेशन सहित सभी सेवाएं पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। प्रत्येक बच्चे के साथ दो अभिभावकों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। नवक्रांति इंडिया न्यूज़ के विशेष संवाददाता धनंजय कुमार से बातचीत के दौरान मासूमों के परिजन व अभिभावक भावुक शब्दों में बोले धरती पर भगवान देखना है; तो वह जगह है श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल।

वें बोले हम मरते दम तक इतने बड़े निःशुल्क मधुर वचन वाले अस्पताल तक पहुंच ना पाते। यह पहल विशेष रूप से दूरस्थ एवं अत्यंत पिछड़े क्षेत्रों के बच्चों के लिए जीवन दायिनी सिद्ध हो रही है, जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच सीमित है एवं ज्यादातर क्षेत्रों के अस्पतालों में मरीजों के सेहत और आर्थिक दोहन होता रहा है। ऐसे में श्री सत्य साई संजीवनी अस्पताल, धरती पर किसी फरिश्ता से कम नहीं! बताते चले की यह अभियान न केवल बच्चों को नया जीवन प्रदान कर रहा है, बल्कि पूरे झारखंड के लिए आशा और नवजीवन की एक सशक्त किरण बनकर उभर रहा है।

उल्लेखनीय है कि “नन्हा सा दिल” अभियान के तहत जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों की विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क जांच की जा रही है। स्क्रीनिंग के दौरान संदिग्ध पाए गए बच्चों को आगे की जांच एवं उपचार हेतु चिन्हित कर संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर भेजा जा रहा है। जिला प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में शिविरों में भाग लेकर अपने बच्चों की जांच अवश्य कराएं, ताकि समय रहते रोग की पहचान कर उचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

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