सीएचसी अलीगंज में जीरो डोज इम्प्लीमेंटेशन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, टीकाकरण से वंचित हर बच्चे तक पहुंचेगी स्वास्थ्य विभाग की टीम

दिलीप सिंह अलीगंज एटाGAVI, PCI India और WHO के सहयोग से आशा, आंगनबाड़ी, आशा संगिनी एवं एएनएम को दिया गया प्रशिक्षण, माइक्रोप्लानिंग, डेटा प्रबंधन और समुदाय में जागरूकता बढ़ाने पर विशेष फोकससीएचसी अलीगंज में जीरो डोज इम्प्लीमेंटेशन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण शुरू, टीकाकरण से वंचित हर बच्चे तक पहुंचेगी स्वास्थ्य विभाग की टीम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) अलीगंज में सोमवार से GAVI (द वैक्सीन एलायंस), PCI India एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘जीरो डोज इम्प्लीमेंटेशन’ विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। 27 जुलाई से 30 जुलाई तक चलने वाले इस प्रशिक्षण का उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान करना है, जिन्हें जन्म के बाद अब तक नियमित टीकाकरण का एक भी टीका नहीं लग पाया है, तथा उन्हें शीघ्र राष्ट्रीय नियमित टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) से जोड़कर पूर्ण सुरक्षा प्रदान करना है।कार्यक्रम की अध्यक्षता चिकित्सा अधीक्षक डॉ सर्वेश कुमार ने की। प्रशिक्षण में क्षेत्र की आशा कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा संगिनी तथा एएनएम ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को फील्ड स्तर पर आने वाली चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।विशेषज्ञों ने बताया कि ‘जीरो डोज’ ऐसे बच्चों को कहा जाता है, जिन्हें नियमित टीकाकरण का पहला टीका भी नहीं लग पाया है।

ऐसे बच्चे खसरा, पोलियो, डिप्थीरिया, काली खांसी, टिटनेस, हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया और अन्य जानलेवा बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। इसलिए इन बच्चों की समय रहते पहचान कर उन्हें नियमित टीकाकरण से जोड़ना स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।प्रशिक्षण में बीपीएम दिव्यांशी भदौरिया, PCI GAVI के ब्लॉक कोऑर्डिनेटर पुष्पेंद्र सिंह,भानु प्रताप तथा WHO के फील्ड मॉनिटर अतुल चतुर्वेदी ने प्रतिभागियों को तकनीकी एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया।

उन्होंने घर-घर सर्वेक्षण की प्रक्रिया, जीरो डोज बच्चों की पहचान, लाभार्थियों का सत्यापन, माइक्रोप्लान तैयार करने, डेटा प्रबंधन, नियमित फॉलो-अप, टीकाकरण सत्रों की मॉनिटरिंग और समयबद्ध रिपोर्टिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी।प्रशिक्षण के दौरान बताया गया कि कई बार पलायन, जागरूकता की कमी, सामाजिक भ्रांतियों, दूरस्थ क्षेत्रों में रहने अथवा अन्य कारणों से कुछ बच्चे नियमित टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं।

ऐसे बच्चों तक पहुंचने के लिए आशा, आंगनबाड़ी, एएनएम और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम गांव-गांव जाकर सर्वे करेगी तथा प्रत्येक पात्र बच्चे को टीकाकरण सत्र तक लाने का प्रयास करेगी।प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को यह भी बताया कि केवल बच्चों की पहचान करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके परिवारों से लगातार संपर्क बनाए रखना, टीकाकरण की निर्धारित तिथि की जानकारी देना, छूटे हुए बच्चों का फॉलो-अप करना और टीकाकरण के बाद रिकॉर्ड को समय से अपडेट करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

इसके लिए सभी फील्ड कर्मचारियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।बैठक में समुदाय में टीकाकरण को लेकर फैली अफवाहों और भ्रांतियों को दूर करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वे अभिभावकों को समझाएं कि नियमित टीकाकरण बच्चों को गंभीर और जानलेवा बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी और सुरक्षित माध्यम है।प्रत्येक गांव, मजरा और बस्ती में जनजागरूकता अभियान चलाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी पात्र बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे।

अधिकारियों ने कहा कि यह प्रशिक्षण केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रतिभागियों को फील्ड आधारित अभ्यास, केस स्टडी, माइक्रोप्लान तैयार करने, डेटा विश्लेषण और वास्तविक परिस्थितियों में कार्य करने के तरीकों से भी अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षण के उपरांत सभी प्रतिभागी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जीरो डोज बच्चों की पहचान कर उन्हें नियमित टीकाकरण कार्यक्रम से जोड़ने का अभियान चलाएंगे।

स्वास्थ्य विभाग ने विश्वास जताया कि GAVI, PCI India, WHO तथा फील्ड स्तर पर कार्यरत आशा, आंगनबाड़ी, आशा संगिनी और एएनएम के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में नियमित टीकाकरण का दायरा और अधिक मजबूत होगा तथा “कोई भी बच्चा टीकाकरण से वंचित न रहे” के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल किया जा सकेगा।

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