शिकायतों की फाइलें बढ़ती रहीं, लेकिन कार्रवाई नहीं; काशीराम कॉलोनी में पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

शाम ढलते ही जुआरियों-शराबियों का जमावड़ा, फरियादियों का आरोप, शिकायतें हुईं, मगर नतीजा शून्य

अलीगंज। अलीगंज क्षेत्र की काशीराम शहरी आवास कॉलोनी एक बार फिर सुर्खियों में है। संपूर्ण समाधान दिवस में पहुंचे कॉलोनीवासियों ने न केवल अवैध कब्जों और गंदगी की शिकायत की, बल्कि कानून-व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए। लोगों का आरोप है कि वर्षों से शिकायतों का सिलसिला जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभागों के साथ-साथ पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में बनी हुई है।

निवासियों का कहना है कि कॉलोनी में शाम होते ही जुआरियों और शराबियों का जमावड़ा लगना आम बात हो गई है। खुलेआम ताश के पत्तों पर दांव लगाए जाते हैं, शराबखोरी होती है और कई बार विवाद भी होते हैं। आरोप है कि इसकी जानकारी संबंधित तंत्र को होने के बावजूद हालात में कोई खास बदलाव नहीं दिखाई देता। यही वजह है कि असामाजिक तत्वों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

कॉलोनी की महिलाओं का कहना है कि जब भी किसी घटना या विवाद की शिकायत की जाती है तो आश्वासन तो मिल जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर असर दिखाई नहीं देता। उनका आरोप है कि यदि समय रहते सख्ती दिखाई गई होती तो कॉलोनी का माहौल इतना खराब नहीं होता। लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि शिकायतों की फाइलें तो आगे बढ़ती हैं, लेकिन कार्रवाई बीच रास्ते में ही दम तोड़ देती है। निवासी फरीन ने आरोप लगाया कि जुआ और शराब के कारण आए दिन तनाव का माहौल बना रहता है।

विरोध करने वालों को उल्टा धमकियों का सामना करना पड़ता है। वहीं अन्य निवासियों का कहना है कि कॉलोनी में कई बार झगड़े और मारपीट की घटनाएं भी हो चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई की गति इतनी धीमी रही कि लोगों का भरोसा कमजोर पड़ने लगा है।

कॉलोनीवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि यदि पुलिस और संबंधित विभाग नियमित निगरानी और प्रभावी कार्रवाई करते तो कॉलोनी असामाजिक गतिविधियों का अड्डा न बनती। लोगों का कहना है कि जब शिकायतों के बाद भी हालात नहीं बदलते, तो व्यवस्था की गंभीरता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

संपूर्ण समाधान दिवस में जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में कॉलोनीवासियों ने साफ शब्दों में कहा कि अब उन्हें केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर कार्रवाई चाहिए।

उनका कहना है कि यदि इस बार भी शिकायतें कागजों तक सीमित रहीं, तो वे उच्च अधिकारियों के समक्ष पूरे मामले को मजबूती से उठाने के लिए बाध्य होंगे। जिलाधिकारी द्वारा जांच के निर्देश दिए जाने के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित समस्याओं पर आखिरकार कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।

दिलीप सिंह मंडल ब्योरों एटा उत्तर प्रदेश

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