रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने झारखंड राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त को पत्र लिखकर राज्य के सभी विभागों के जन सूचना पदाधिकारियों (PIO) एवं प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों की राज्यस्तरीय समीक्षा बैठक तत्काल बुलाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम, 2005 लोकतंत्र को मजबूत करने वाला ऐतिहासिक कानून है, जिसका उद्देश्य शासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनता की भागीदारी सुनिश्चित करना है। कांग्रेस हमेशा सूचना के अधिकार और पारदर्शी शासन की पक्षधर रही है तथा इस कानून को कमजोर करने की किसी भी प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

विजय शंकर नायक ने कहा कि झारखंड के अनेक विभागों, निगमों, बोर्डों, विश्वविद्यालयों और स्थानीय निकायों में सूचना का अधिकार अधिनियम का समुचित पालन नहीं हो रहा है। हजारों नागरिकों को कानून में निर्धारित 30 दिनों की समय-सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। कई मामलों में आवेदन महीनों तक लंबित रखे जाते हैं, अपूर्ण सूचना दी जाती है या बिना किसी वैधानिक कारण के सूचना देने से इनकार कर दिया जाता है। इसके कारण आम नागरिकों को प्रथम और द्वितीय अपील की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, जिससे राज्य सूचना आयोग पर लंबित मामलों का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सूचना का अधिकार अधिनियम की मूल भावना और नागरिकों के वैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। यदि जन सूचना पदाधिकारी कानून द्वारा निर्धारित समय-सीमा का पालन नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध अधिनियम की धारा-20 के तहत दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।
प्रदेश प्रवक्ता ने राज्य सूचना आयोग से मांग की कि सभी जन सूचना पदाधिकारियों एवं प्रथम अपीलीय प्राधिकारियों की तत्काल राज्यस्तरीय समीक्षा एवं अभिमुखीकरण बैठक आयोजित की जाए। साथ ही स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं कि प्रत्येक सूचना आवेदन का निस्तारण 30 दिनों के भीतर अनिवार्य रूप से किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि बिना उचित कारण सूचना देने में विलंब करने अथवा अधिनियम का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर धारा-20 के तहत आर्थिक दंड लगाया जाए तथा आवश्यकता होने पर संबंधित विभाग को अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति भी भेजी जाए।
विजय शंकर नायक ने कहा कि यदि राज्य सूचना आयोग इस दिशा में प्रभावी पहल करता है तो सूचना का अधिकार अधिनियम का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित होगा। इससे शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी, नागरिकों का विश्वास बढ़ेगा तथा आयोग के समक्ष लंबित अपीलों और शिकायतों की संख्या में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सूचना छिपाना नहीं, बल्कि सूचना देना शासन की जिम्मेदारी है। सूचना का अधिकार किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का वैधानिक और लोकतांत्रिक अधिकार है। राज्य सूचना आयोग को इस अधिकार की रक्षा के लिए और अधिक सक्रिय एवं प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए।
