सीबीएसई के दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियंत्रण और गणित आधारित शिक्षण पर दिया जोर

अलीगंजविद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ और तार्किक चिंतन से जोड़ने के उद्देश्य से जीडी इंटरनेशनल स्कूल में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से दो दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम के दौरान विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियंत्रण और गणित के समन्वित शिक्षण पर विस्तार से जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों को आपस में जोड़कर पढ़ाने से विद्यार्थियों की समझ विकसित होती है और सीखने की प्रक्रिया अधिक रुचिकर बनती है।कार्यक्रम में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विशेषज्ञ प्रशिक्षक दीपक कुमार और सौरभ प्रताप सिंह ने शिक्षण और सीखने की प्रक्रिया में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियंत्रण तथा गणित की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, रचनात्मकता, तार्किक क्षमता और समस्याओं का समाधान खोजने की योग्यता विकसित करना भी है।
विशेषज्ञों ने शिक्षकों को समझाया कि कक्षाओं में विद्यार्थियों को केवल जानकारी देने के बजाय उन्हें प्रयोग करने, सवाल पूछने और स्वयं निष्कर्ष निकालने के अवसर प्रदान किए जाने चाहिए। इससे बच्चे विषयों को बेहतर ढंग से समझने के साथ अपने ज्ञान का उपयोग वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में भी कर सकेंगे। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियंत्रण और गणित का संयुक्त अध्ययन विद्यार्थियों को नई सोच विकसित करने तथा कठिन विषयों को सरलता से समझने में सहायता करता है। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में शिक्षकों की शिक्षण क्षमता को निखारने और पढ़ाई को अधिक प्रभावशाली बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
प्रशिक्षकों ने नवीन शिक्षण तकनीकों की जानकारी साझा करते हुए विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि कक्षा में गतिविधियों और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से पढ़ाने से विद्यार्थियों की रुचि बढ़ती है तथा विषयों की अवधारणाएं लंबे समय तक याद रहती हैं। कार्यक्रम में विद्यालय के निदेशक यश यादव और प्रधानाचार्य आकाश शुक्ला सहित जीडी इंटरनेशनल स्कूल तथा अन्य विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे। प्रशिक्षण के माध्यम से शिक्षकों को अपने अनुभव साझा करने और शिक्षण की नई विधियों को समझने का अवसर मिला।
