नवरात्र के बीच सामने आई घटना ने बेटियों की सुरक्षा और नवजात के संरक्षण को लेकर खड़े किए सवाल
संवाददाता आकाश मिश्र,
बहराइच। एक ओर शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना कर बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का संदेश दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रामगांव थाना क्षेत्र स्थित श्री मरी माता मंदिर के शौचालय में एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में मिलने की घटना सामने आई है। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर स्थानीय लोगों को इसकी जानकारी हुई। सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बच्ची को अस्पताल पहुंचाया।

जानकारी के अनुसार, मंगलवार को मंदिर परिसर स्थित शौचालय में नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। लोगों ने मौके पर जाकर देखा तो वहां बच्ची लावारिस हालत में मिली। घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई, जिसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई।
पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने संभाली जिम्मेदारी
सूचना मिलते ही रामगांव थाना प्रभारी दिवाकर तिवारी ने पुलिस टीम को मौके पर भेजा। इसके बाद पुलिस और चाइल्ड लाइन की टीम ने नवजात बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसकी देखभाल की व्यवस्था की गई।
घटना ने बेटियों की सुरक्षा पर उठाए सवाल
नवरात्र जैसे पर्व के दौरान सामने आई इस घटना ने नवजात बच्चियों की सुरक्षा और उनके प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। किसी भी परिस्थिति में नवजात को असुरक्षित स्थान पर छोड़ना उसके जीवन के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।

यदि कोई माता-पिता या परिवार किसी कारणवश बच्चे का पालन-पोषण करने में असमर्थ है, तो बच्चे को लावारिस छोड़ने के बजाय बाल कल्याण समिति और अधिकृत दत्तक ग्रहण एजेंसियों के माध्यम से कानूनी सहायता एवं संरक्षण प्राप्त किया जा सकता है।
बच्ची को छोड़ने वाले की पहचान का इंतजार
फिलहाल नवजात बच्ची को अस्पताल पहुंचाए जाने की जानकारी सामने आई है। उसे मंदिर के शौचालय में छोड़ने वाले व्यक्ति की पहचान और घटना के पीछे के कारणों के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है। मामले में पुलिस की जांच और संबंधित अधिकारियों की ओर से दी जाने वाली जानकारी के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का संदेश केवल पर्वों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे व्यवहार में भी उतारना जरूरी है।
