बुढ़मू, चांया गांव में दलित युवक की नृशंस मॉब लिंचिंग—यह केवल हत्या नहीं, बल्कि संविधान और मानवता की सामूहिक हत्या है; बर्दाश्त नहीं किया जाएगा नामजद हत्यारों की गिरफ्तारी में कोताही पर उग्र आंदोलन होगा-विजय शंकर नायक

रांची

बुढ़मू प्रखंड के चांया गांव में 18 वर्षीय दलित युवक विक्की नायक, पिता तुलसी नायक, की पीट-पीटकर की गई हत्या ने झारखण्ड ही नहीं, पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। यह कोई सामान्य “घटना” नहीं, बल्कि सुनियोजित भीड़-हिंसा (Mob Lynching) है, जिसमें कानून को हाथ में लेकर एक निर्दोष दलित युवक की जान ली गई।

उपरोक्त बातें आज कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कांके विधायक प्रत्याशी विजय शंकर नायक ने कहीं। उन्होंने कहा कि प्राप्त तथ्यों के अनुसार, मोटर चोरी के झूठे आरोप में पहले ग्रामीण बैठक बुलाई गई, फिर विक्की नायक से जबरन अपराध स्वीकार कराया गया और उसके बाद उसके माता-पिता की मौजूदगी में बेरहमी से लात-घूंसे मारे गए, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 (समानता का अधिकार, भेदभाव-निषेध और जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का खुला और घोर उल्लंघन है।

विजय शंकर नायक ने बताया कि मृतक की मां भुटकी देवी के अनुसार, 11 जनवरी की रात कामेश्वर यादव (उर्फ सरपंच) और विशुन यादव के कुएं से मोटर चोरी होने की बात कही गई। गुरुवार शाम कामेश्वर यादव तुलसी नायक के घर पहुंचे और विक्की पर चोरी का आरोप लगाया। अगले दिन गांव में बैठक बुलाकर “जुर्म कबूल” कराने की साजिश रची गई।

इसी बीच रात में किसी ने मोटर कुएं पर वापस रख दी। शुक्रवार सुबह विक्की को गांव के दो लोग मोटरसाइकिल पर बैठाकर बैठक में ले गए, जहां जबरन कबूलनामे के बाद उसे बेरहमी से पीटा गया।

इस जघन्य अपराध में सरुला मुंडा, बबीया मुंडा, रामजी महतो, मनोज यादव, बिनोद मुंडा सहित अन्य लोगों की संलिप्तता बताई जा रही है।

विजय शंकर नायक ने दो टूक कहा कि भीड़-न्याय कानून का विकल्प नहीं हो सकता। यह दलितों और गरीबों के खिलाफ जारी सामाजिक हिंसा का भयावह चेहरा है। दोषियों को संरक्षण देना या मामले को कमजोर करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी से पलायन होगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस गंभीर मामले में मुख्यमंत्री, झारखण्ड, डीजीपी, झारखण्ड, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिले और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी सजा सुनिश्चित हो।

हमारी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं—

सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी।

SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की कठोरतम धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हो।

पीड़ित परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये मुआवजा एवं एक परिजन को सरकारी नौकरी।

मामले की न्यायिक जांच कर फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई।

गांव में पीड़ित परिवार और गवाहों को पूर्ण सुरक्षा, अन्यथा यह संदेश जाएगा कि सच बोलने वालों की जान खतरे में है।

यह सिर्फ विक्की नायक की हत्या नहीं है—
यह सवाल है कि क्या दलित होना आज भी मौत की सजा है?

अगर इस लिंचिंग पर राज्य चुप रहा, तो यह चुप्पी अगली हत्या का लाइसेंस होगी। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि नामजद हत्यारों की गिरफ्तारी में कोताही बरती गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि कानून के राज बनाम भीड़ के राज की निर्णायक परीक्षा है। यदि दोषियों को सख्त सजा नहीं मिली, तो यह संदेश जाएगा कि दलितों की जान सस्ती है—जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *