नाइजीरिया के प्रतिनिधिमंडल ने सराहा टप्पल का आजीविका मॉडल, महिला सशक्तिकरण की वैश्विक मिसाल बना अलीगढ़


अलीगढ़। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर), नई दिल्ली द्वारा आयोजित “समावेशी एवं सतत अनुकूलनशील सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों” विषयक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को नाइजीरिया का 28 सदस्यीय उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल अलीगढ़ के विकास खंड टप्पल एवं जट्टारी पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (यूपीएसआरएलएम) के तहत संचालित स्वयं सहायता समूहों के सफल आजीविका मॉडलों का अवलोकन किया और महिला नेतृत्व आधारित उद्यमिता की खुलकर सराहना की।


प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व नाइजीरिया के मानवीय कार्य एवं गरीबी उन्मूलन मंत्री डॉ. बर्नार्ड एम. डोरो ने किया। अध्ययन भ्रमण के दौरान प्रतिनिधियों ने जैव उर्वरक, तिलहन प्रसंस्करण, दुग्ध उत्पादन एवं प्रसंस्करण इकाई, बैग निर्माण केंद्र, प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र, उन्नति कृषि प्रसंस्करण इकाई तथा ग्रामीण स्वावलंबन केंद्र का निरीक्षण किया। महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा संचालित इन इकाइयों की कार्यप्रणाली, गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और विपणन व्यवस्था को देखकर प्रतिनिधिमंडल ने इसे विकासशील देशों के लिए अनुकरणीय मॉडल बताया।


उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविक शक्ति बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि टप्पल और जट्टारी में महिलाओं द्वारा संचालित उद्यम यह साबित करते हैं कि आर्थिक रूप से सशक्त महिलाएं गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि नाइजीरिया जैसे मित्र राष्ट्र के प्रतिनिधिमंडल द्वारा उत्तर प्रदेश के ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण मॉडल की सराहना पूरे प्रदेश के लिए गौरव की बात है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार द्वारा महिला सशक्तिकरण, स्वरोजगार और ग्रामीण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की बात भी दोहराई।


कार्यक्रम की शुरुआत जीवन ज्योति समग्र चेतना मंच द्वारा स्वागत एवं संवाद सत्र से हुई। इस दौरान स्वयं सहायता समूहों की उपलब्धियों, मिशन की कार्यप्रणाली और “आजीविका उन्नयन मार्ग” विषय पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुतीकरण में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, सामाजिक सुरक्षा, सामुदायिक सहभागिता और रोजगार सृजन की विभिन्न सफल पहलों की जानकारी साझा की गई।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की मिशन निदेशक दीपा रंजन ने कहा कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय अध्ययन भ्रमण प्रदेश की ग्रामीण विकास योजनाओं को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का उत्साह भी बढ़ाते हैं। संयुक्त मिशन निदेशक प्रवीणा नंद ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य विदेशी प्रतिनिधियों को भारत में विकसित समावेशी सामाजिक सुरक्षा प्रणाली, आजीविका संवर्धन और रोजगार सृजन के सफल मॉडलों से परिचित कराना है।


नाइजीरिया की सुप्रीम मैनेजमेंट ट्रेनिंग एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज की उप मुख्य परामर्शदाता एवं मुख्य परिचालन अधिकारी ओलुवातोयिन ओलोमो ने भारत में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह मॉडल नाइजीरिया सहित अन्य विकासशील देशों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि भारत में मिला आत्मीय स्वागत और यहां की ग्रामीण विकास योजनाएं उनके लिए यादगार अनुभव हैं।
मुख्य विकास अधिकारी योगेंद्र कुमार ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने स्वयं सहायता समूहों के संचालन, पंचसूत्र, चुनौतियों एवं समाधान सहित विभिन्न पहलुओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

वहीं जिलाधिकारी अविनाश कुमार ने कहा कि वर्ष 2024 में राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने के बाद टप्पल स्वयं सहायता समूहों एवं आजीविका संवर्धन के सफल मॉडलों के अध्ययन का प्रमुख केंद्र बन गया है।
कार्यक्रम में उपायुक्त (स्वरोजगार) मंजू त्रिवेदी, खंड विकास अधिकारी विजय कुमार तिवारी, एनआईआरडीपीआर की प्रोफेसर एवं केंद्राध्यक्ष डॉ. रुचिरा भट्टाचार्य, शोध एवं प्रशिक्षण अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार सिंह, मिशन कार्यालय के अधिकारी, जिला प्रशासन के अधिकारी, स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। भ्रमण के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने ग्रामीणों और बच्चों से भी संवाद किया तथा उत्तर प्रदेश के महिला सशक्तिकरण एवं ग्रामीण विकास मॉडल को विकासशील देशों के लिए प्रेरणादायी बताया।

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