बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी ही उड़ा रहे शासनादेश की धज्जियां

आदेश कुछ और, गोंडा के स्कूलों में हो रहा कुछ और!

गोंडा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के संचालन को लेकर स्पष्ट आदेश जारी किए गए हैं। लेकिन जनपद गोंडा में इन आदेशों की खुलेआम अनदेखी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि जिले के कई सरकारी विद्यालयों में दोपहर 12 बजे ही ताला लगाकर बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों की भी छुट्टी कर दी जा रही है, जबकि शासनादेश में विद्यालय संचालन का समय अलग निर्धारित किया गया है।


वायरल हो रहे शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश, लखनऊ के पत्रांक 3388-3575/2026-27 दिनांक 20 अप्रैल 2026 के अनुसार, प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों का संचालन प्रातः 7:30 बजे से अपराह्न 1:30 बजे तक किया जाना है। आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि छात्र-छात्राएं सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहेंगे, जबकि शिक्षक एवं शिक्षामित्र 1:30 बजे तक विद्यालय में रहकर शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य संपादित करेंगे।


इसके बावजूद जनपद गोंडा के कई विद्यालयों में दोपहर 12 बजे ही स्कूलों में ताला लग जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। जब इस संबंध में खंड शिक्षा अधिकारी हलधरमऊ तथा बेसिक शिक्षा अधिकारी गोंडा से सवाल किया गया तो दोनों अधिकारियों द्वारा कथित रूप से यह कहा गया कि “विद्यालय का समय सुबह 7 बजे से 12 बजे तक है और 12 बजे के बाद बच्चों व अध्यापकों की छुट्टी हो जाती है।”


सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन का स्पष्ट आदेश मौजूद है, तो फिर जिले के जिम्मेदार अधिकारी किस आदेश के तहत विद्यालयों का समय बदल रहे हैं? क्या गोंडा में शिक्षा विभाग शासनादेश से ऊपर चल रहा है? यदि शिक्षक 1:30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहने के लिए बाध्य हैं, तो फिर 12 बजे स्कूलों में ताला क्यों लग रहा है? शिक्षा विभाग की इस कार्यप्रणाली पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं।

अभिभावकों का कहना है कि भीषण गर्मी के नाम पर यदि समय में परिवर्तन किया गया है तो उसका लिखित आदेश सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? वहीं शिक्षा विभाग के भीतर भी चर्चा है कि मौखिक आदेशों के सहारे विद्यालय संचालन कराया जा रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि शासनादेश की अवहेलना हो रही है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों की सीधी अनदेखी है। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हैं या फिर गोंडा में “अपना अलग नियम” चलता रहेगा।

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