मूत्र रिसाव एक सामान्य समस्या है और इसका उपचार संभव है। होने दे : डॉ. अंशु

वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक : प्रत्येक वर्ष जून के तीसरे सप्ताह में वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक मनाए जाते हैं। यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस का अर्थ है पेशाब का अनियंत्रित रूप से निकल जाना। दरअसल कई लोग मूत्र रिसाव (पेशाब का अनियंत्रित रूप से निकलना) की समस्या से खामोशी से जूझते रहते हैं और इसे बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा या शर्म की बात समझते हैं।

विश्व मूत्र असंयमिता जागरूकता सप्ताह के अवसर पर यह समझना महत्वपूर्ण है कि यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस एक चिकित्सीय स्थिति है, और अधिकांश मामलों में इसका सफलतापूर्वक उपचार किया जा सकता है। यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस का अर्थ है पेशाब का अनियंत्रित रूप से निकल जाना।

हालांकि इसे आमतौर पर बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह समस्या अब युवाओं में भी देखने को मिल रही है, विशेष रूप से प्रसव के बाद महिलाओं में तथा प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं से ग्रस्त पुरुषों में। महिलाओं में यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस का एक सबसे सामान्य प्रकार स्ट्रेस यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस (एसयूआई) है।

इस स्थिति में खांसी, छींक, हंसने, दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने या वजन उठाने जैसी गतिविधियों के दौरान, जब पेट के भीतर दबाव बढ़ता है, तो अनियंत्रित रूप से मूत्र का रिसाव हो सकता है। यह समस्या अक्सर गर्भावस्था और प्रसव के बाद पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों तथा मूत्राशय को सहारा देने वाले ऊतकों के कमजोर होने के कारण पैदा होती है।

एक अन्य सामान्य स्थिति अर्ज यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस है, जिसमें व्यक्ति को अचानक और बहुत तेज़ी से पेशाब आने का एहसास होता है तथा कई बार वह समय पर शौचालय तक नहीं पहुंच पाता, जिससे मूत्र का रिसाव हो सकता है। ऐसे मरीज अक्सर दिन और रात दोनों समय बार बार पेशाब आने की शिकायत करते हैं। यह समस्या आमतौर पर ओवरएक्टिव ब्लैडर के कारण हो सकती है।

कुछ मरीज मिक्स्ड यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस से पीड़ित होते हैं, जिसमें स्ट्रेस यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस और अर्ज यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस दोनों के लक्षण एक साथ दिखाई देते हैं। मूत्र रिसाव की समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। पुरुषों में भी यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस विकसित हो सकता है, विशेष रूप से बेनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (बीपीएच) अर्थात प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने की स्थिति में।

जब बढ़ा हुआ प्रोस्टेट लंबे समय तक मूत्र के प्रवाह में रुकावट पैदा करता है, तो मूत्राशय अत्यधिक सक्रिय या कमजोर हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप बार बार पेशाब लगना, अचानक पेशाब की तीव्र इच्छा होना, मूत्र रिसाव, पेशाब का कमजोर प्रवाह तथा मूत्राशय का पूरी तरह खाली न हो पाना जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। कुछ मामलों में प्रोस्टेट के उपचार के बाद भी मूत्र रिसाव की समस्या देखी जा सकती है।अच्छी बात यह है कि यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस का प्रभावी ढंग से उपचार किया जा सकता है।

उपचार की शुरुआत उचित जांच और यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस के प्रकार की पहचान से होती है। कई मामलों में जीवनशैली में कुछ सरल बदलाव भी काफी लाभकारी साबित होते हैं। इनमें चाय और कॉफी का अत्यधिक सेवन कम करना, शरीर का वजन नियंत्रित रखना, कब्ज की समस्या को दूर करना तथा निर्धारित समय पर नियमित रूप से पेशाब करने की आदत अपनाना शामिल है।

पेल्विक फ्लोर मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम (केगल एक्सरसाइज) स्ट्रेस यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस के उपचार में अत्यंत प्रभावी होते हैं और इन्हें अक्सर उपचार की पहली पंक्ति के रूप में अपनाया जाता है। यूरोलॉजिस्ट, टाटा मेन हॉस्पिटल से डॉ. अंशु कुमार कहते हैं कि अर्ज यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस के मामलों में दवाएं मूत्राशय को आराम पहुंचाने तथा बार बार और अचानक पेशाब लगने की समस्या को कम करने में मदद करती हैं।

जिन मरीजों को दवाओं से पर्याप्त लाभ नहीं मिलता, उनके लिए आधुनिक और उन्नत उपचार विकल्प भी उपलब्ध हैं। जिन मरीजों में स्ट्रेस यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस के लक्षण जीवनशैली में बदलाव और अन्य सामान्य उपचारों के बावजूद बने रहते हैं, उनके लिए न्यूनतम चीरा आधारित शल्य प्रक्रियाएं अत्यंत प्रभावी परिणाम प्रदान कर सकती हैं।

किसी भी व्यक्ति को मूत्र रिसाव की समस्या को जीवन का सामान्य हिस्सा मानकर स्वीकार नहीं करना चाहिए। समय रहते यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लेने से आत्मविश्वास, सामाजिक जीवन, कार्यक्षमता तथा जीवन की समग्र गुणवत्ता में महत्वपूर्ण सुधार लाया जा सकता है। यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस एक सामान्य समस्या है, इसे नजरांदाज कर असामान्य न होने दे।

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